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प्रतिभा : मोबाइल से सीखा खेल और फहरा दिया विश्व में तिरंगा, शतंरज की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में बनाया स्थान

Wed, 07 Jun 2023 03:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रीतमनगर स्थित चिल्ड्रेंस च्वाइस स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा संस्कृति ने कीर्तिमान स्थापित करते हुए शतरंज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इंटरनेशनल चेस फेडरेशन (फीडे) की ओर से इस महीने जारी रैंकिंग में अंडर-7 बालिका वर्ग में संस्कृति यादव को विश्व में पांचवां स्थान हासिल हुआ है।
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संस्कृति यादव। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। इसका जीता जागता उदाहरण शहर की सात वर्षीय बेटी संस्कृति यादव हैं, जिन्होंने शह और मात के खेल शतरंज में विश्व की रैंकिंग में पांचवां स्थान हासिल कर भारत का नाम रोशन किया है। प्रीतमनगर स्थित चिल्ड्रेंस च्वाइस स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा संस्कृति ने कीर्तिमान स्थापित करते हुए शतरंज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

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इंटरनेशनल चेस फेडरेशन (फीडे) की ओर से इस महीने जारी रैंकिंग में अंडर-7 बालिका वर्ग में संस्कृति यादव को विश्व में पांचवां स्थान हासिल हुआ है। फेडरेशन की रैंकिंग में उन्हें कुल 1223 अंक मिले हैं और वह पांचवें स्थान पर हैं। जबकि सूची में पहले नंबर पर प्रयागराज की ही सात वर्षीय अनुप्रिया यादव हैं। इसके अलावा दूसरे नंबर पर फ्रांस, तीसरे पर बांग्लादेश और चौथे नंबर पर इंग्लैड की खिलाड़ी है।

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संस्कृति यादव, अपने माता-पिता के साथ। - फोटो : अमर उजाला।

मोबाइल से सीखा शतरंज का हुनर

ट्रांसपोर्टनगर के पास महेंद्रनगर में रहने वाली संस्कृति यादव के पिता सरकारी शिक्षक हैं। जबकि मां गृहिणी हैं। बेटी की उपलब्धि पर माता-पिता फूले नहीं समा रहे हैं। पिता ने बताया कि संस्कृति ने कोरोना काल में मोबाइल पर शतरंज का खेल खेलना शुरू किया। पहले तो वह इसे महज एक मोबाइल गेम की ही तरह खेलती थीं, लेकिन बाद में वह बेहतरीन खेल खेलने लगीं। संस्कृति के अच्छे खेल को देखकर कोच रईसउद्दीन खान और स्पर्श यादव से प्रशिक्षण भी दिलाने लगे, जिसके बाद वह लगातार चैंपियन बनती रहीं।

इन प्रतियोगिताओं में लहराया परचम

संस्कृति ने इसी वर्ष 22-27 मई तक उत्तराखंड के रुद्रपुर में आयोजित हुई फिडे रेटिंग ओपेन चेस प्रतियोगिता में अंडर-8 वर्ग में विजेता बनने की उपलब्धि हासिल की थी। अप्रैल में मध्य प्रदेश के सागर में आयोजित अंडर-7 वर्ग की प्रतियोगिता में खिताब जीता। वर्ष 2022 में गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में 22वीं, झांसी में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में तीसरी और लखनऊ में आयोजित हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया था।
 

15 बार से ज्यादा बार रहीं डिस्ट्रिक्ट चैंपियन

संस्कृति यादव अलग-अलग वर्ग की प्रतियोगिताओं में अब तक 15 बार से ज्यादा बार डिस्ट्रिक्ट लेवल का टूर्नामेंट जीत चुकी हैं। पिता गजेंद्र के अनुसार बेटी इतनी कम उम्र में इतना बड़ा नाम करेगी, इसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। अब सभी संस्कृति को और ऊंचाई पर जाते हुए देखना चाहते हैं।

पिता ने उधार लेकर किया बेटी के साथ सफर 

संस्कृति के पिता गजेंद्र सिंह कौशाम्बी में सरकारी शिक्षक हैं, लेकिन कई बार उन्हें आर्थिक स्थिति की तंगी का भी सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि ऐसा कई बार हो चुका है कि खराब माली हालात के बीच बेटी का टूर्नामेंट दूर के राज्यों में आयोजित हुआ। वह अपने दोस्तों से पैसे उधार लेकर बेटी को उन प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराने के लिए ले जाते रहे हैं। गजेंद्र कहते हैं कि उनका एक ही सपना है कि उनकी बेटी अपने सपने को पूरा करे और शतरंज की दुनिया में बड़ा मुकाम स्थापित करे।

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मां का सपना बेटी जीते देश के लिए मेडल

संस्कृति की मां रेखा यादव गृहिणी हैं। उनका कहना है कि उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश है कि उनकी बेटी भारत के लिए पदक जीते। रेखा ने कहा कि शतरंज का खेल खेलना बिल्कुल भी आसान नहीं है। संस्कृति ने दो साल पहले ही इसे खेलना शुरू किया है और वह यहां तक पहुंच जाएंगी इस बात का कभी भी अंदाजा नहीं था। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।

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