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नेता ‘महालंठ’ बने, कवि बने ‘लंठाधिराज’

Mon, 05 Mar 2018 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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महालंठ सम्मेलन के जरिए रविवार की रात प्रयाग की सांस्कृतिक चेतना की मिसाल पेश की गई। अगड़म-बगड़म मालाओं से अतिथियों, कवियों को लंठ बनाया गया। लौकी भेंटकर, धोती पहनाकर सांसद विनोद सोनकर को महालंठ की उपाधि दी गई। जबकि सब्जियों की मालाएं पहनाकर विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी और मंचासीन कवियों को लंठाधिराज से विभूषित किया गया। इस मौके पर कवियों के चुटीले व्यंग और तंज पर हंसी के हंसगुल्ले फूटते रहे। इस कवि सम्मेलन में लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।
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खुल्दाबाद में सजे भव्य मंच पर सूबे के उड्डयन मंत्री नंद गोपाल नंदी ने दीप प्रज्ज्वलन कर महालंठ सम्मेलन की शुरुआत की। शुरुआत हुई आश्रया द्विवेदी की वाणी वंदना से। उन्होंने फाग गाया और नृत्य समूह ने फूलों की होली पर रास भी किया। इसके बाद कविता पाठ की बारी आई। ओज के कवि भूषण त्यागी ने कविताओं के जरिए पकौड़े पर तंज कसा। पंक्तियां इस तरह थीं- देश चलता है आप भी चलिए/वोट देकर के हाथ मत मलिए/ राष्ट्र को तल रहा हूं मैं हंसकर/ आप ठेले पे पकौड़ा तलिए...।इनके बाद धर्मप्रकाश मिश्र ने छंद पढ़कर लोगों को गुदगुदाया। कौन रहता है गिद्ध भारत से लुप्त हुए/पेड़ों की बजाय कुर्सियों में पाये जाते हैं/त्रेता वाला गिद्ध सीता माता हेतु जान दिया/कलियुग के गिद्ध सीमाओं को नोच खाते हैं...।

कानपुर से आए डॉ.  कमलेश द्विवेदी की पंक्तियां इस तरह थीं-चढ़े बूढ़ों पे जब यौवन समझ लेना कि होली है/ लगे फिर आ गया बचपन समझ लेना कि होली है...। संचालन कर रहे डॉ श्लेष गौतम ने कविता पढ़ी कि-डूब रहे उतरा रहे देवर भाभी संग/फागुन पर हावी रहा होली का हुड़दंग। इनके बाद राय बरेली से आए नरकंकाल की कविताओं पर खूब ठहाके लगे। उन्होंने पढ़ा- तुम रसभरी हो गुझिया हम झूर धार पापड़/हम तुम्हरे काटी चुटकी तुम हुमकि देव झापड़ / हमहूं करी ठिठोली तुमहूं करो ठिठोली...। साथ ही अजय प्रेमी,मखदूम फूलपुरी, कुमार विकास, कमल प्रतापगढी ने भी काव्यपाठ किया।यह महालंठ सम्मेलन प्रयाग मित्र मंडल की ओर से आयोजित किया गया था। आगतों का स्वागत ऋषि केसरवानी ने किया। धन्यवाद जताया अनिल गुप्ता अन्नू भइया ने।
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