माघ मेले में किन्नर अखाड़े के शिविर में लगी आग।
- फोटो : अमर उजाला
अफसर शॉर्ट सर्किट बता रहे कारण
अग्निशमन विभाग आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट को मान रहा है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुभाष कुमार का कहना है कि घटना ढाई बजे के आसपास की है। उस वक्त लगभग सभी लोग सो रहे थे। खाना बनाने या पूजा का दीपक जलाने जैसी बात भी सामने नहीं आई है। ऐसे में आशंका यही है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी और फिर इसने देखते ही देखते आसपास के टेंटों को भी चपेट में ले लिया।
छह फायर टेंडर मंगवाए गए, दो से आग पर काबू पाया
आग जिस तेजी से फैल रही थी, उसे देखते हुए मौके पर कुल छह फायर टेंडर मंगवाए गए। हालांकि दो फायर टेंडर की मदद से ही आग पर काबू पा लिया गया। शिविर में स्थित टेंटों में बहुत से श्रद्धालु व अखाड़े के सदस्य सो रहे थे, ऐसे में उन्हें बाहर निकलना भी बड़ी चुनौती थी। फायर ब्रिगेड के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए ऐसे लोगों को शिविर से बाहर निकाला।
माघ मेले में किन्नर अखाड़े के शिविर में लगी आग।
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जर्मन एंबेसी से लगाई गुहार
किन्नर अखाड़ा में जिस वक्त आग लगी, वहां जर्मनी से आई मार्टिना डावो भी मौजूद रहीं। उन्होंने बताया कि शिविर में सभी लोग सो रहे थे। तभी अचानक लोगाें के चीखने की आवाजें आने लगीं। वह टेंट से बाहर निकलीं तो देखा कि बगल के टेंटों में आग लगी है। इस पर शिविर से बाहर भागकर उन्होंने अपनी जान बचाई। हालांकि इस दौरान उनका सामान, जिनमें जर्मन मुद्रा व अन्य चीजें शामिल थीं, टेंट में ही रह गया और आग की चपेट में आ गया। मार्टिना ने बताया कि उनके पैसे, कपड़े समेत अन्य सभी सामान जल गए।
साजिश की आशंका
महामंडलेश्वर भवानी मां के टेंट में ओढ़ने,बिछाने और पहनने के कपड़े के साथ मोबाइल तक जल गया। भवानी मां ने बताया कि नौ बजे तक पूजा पाठ चला। 10.30 बजे तक नाचगाने के कार्यक्रम और खाना खाने के बाद सभी सो गए। दो बजे के करीब अचानक आग लग गई। शोर मचा तो जानकारी हुई। यह नहीं पता कि आग लगी या लगाई गई। आग महिला टेंटों में लगी, इसलिए भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया कि हादसे में झुलसने वाले सतवीर व रमेश उनके भाई व भाभी हैं। दोनों को दोपहर बाद परिजन दिल्ली लेकर चले गए।
अभी तक कोई घटना शॉर्ट सर्किट के कारण नहीं हुई है। किन्नर अखाड़ा ने खुद इस बात का खंडन किया है। पिछली बार बैकुंठ धाम शिविर में लगी आग भी सिलिंडर से गैस लीकेज के कारण हुई थी।
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अनूप सिन्हा, अधिशासी अभियंता, माघ मेला