इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भूमिहीन बटाईदार किसान भी मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत मुआवजे के पात्र हैं। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने चित्रकूट निवासी मंजू की याचिका स्वीकार करते हुए जिलाधिकारी का 26 दिसंबर 2025 का आदेश रद्द कर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भूमिहीन बटाईदार किसान भी मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत मुआवजे के पात्र हैं। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने चित्रकूट निवासी मंजू की याचिका स्वीकार करते हुए जिलाधिकारी का 26 दिसंबर 2025 का आदेश रद्द कर दिया।
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कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए डीएम के पास भेज दिया। साथ ही शासनादेश के अनुसार तीन महीने में नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया। मामले में डीएम ने याची के पति फूलचंद्र के नाम कोई भी कृषि भूमि दर्ज नहीं होने के कारण दुर्घटना में मृत्यु के बाद मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया था।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 28 फरवरी 2020 के शासनादेश में बटाई पर खेती करने वाले भूमिहीन व्यक्ति को भी किसान की परिभाषा में शामिल किया गया है। इस कारण वह मुआवजे का हकदार है।
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कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भू-स्वामी नहीं है लेकिन, पट्टे या बटाई पर खेती करता है या उसकी आजीविका का मुख्य साधन खेती है वो भी इस योजना के तहत किसान की परिभाषा में शामिल है। कोर्ट ने पाया कि डीएम ने केवल राजस्व अभिलेख में नाम नहीं होने के आधार पर दावा खारिज कर दिया, जो योजना की मंशा के विपरीत है।