गंगा का प्रवाह तेज होने से माघ मेला क्षेत्र में मंगलवार को सेक्टर चार और पांच के कई शिविरों पर संकट आ गया। इसी के साथ तटों पर बसे संतों और कल्पवासियों की मुसीबतें और बढ़ गईं। देर शाम गंगोली शिवाला पांटून पुल के पीपे में कटान से काफी देर तक यातायात भी प्रभावित रहा।
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- फोटो : prayagraj
उधर, त्रिवेणी पांटून पुल के कुछ पीपे धंस भी गए। काली और त्रिवेणी मार्गों के बीच कई बीघे भूमि जलमग्न हो गई। इससे हड़कंप की स्थिति रही।
मंगलवार को संगम समेत माघ मेला क्षेत्र के सभी पांचों सेक्टर में गंगा के प्रवाह से दिक्कतें पैदा होने लगीं। महावीर मार्ग के अलावा सरस्वती मार्ग के पीछे वाले हिस्से में रेती जलमग्न हो गई।
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इसी तरह त्रिवेणी मार्ग पर तीर्थपुरोहितों की कई बीघे भूमि जलमग्न होने से परेशानी बढ़ गई। सेक्टर-चार स्थित दंडी स्वामी नगर में इस दिन भी शिविरों के प्रभावित होने की आशंका बनी रही। इस वजह से संत और कल्पवासी दिन भर परेशान रहे। गंगा का जलस्तर बढ़ने से सेक्टर चार में शास्त्री पुल के नीचे से लेकर दंडी स्वामीनगर के शिविरों तक का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है।
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स्वामी मुनीशाश्रम के अन्नक्षेत्र परिसर के और शिविरों को भी शिफ्ट कराने की नौबत आ सकती है। फिलहाल बाड़ लगाकर कई जगह कटान रोकने के लिए धारा डायवर्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। उधर, सेक्टर तीन और चार के स्नान घाटों से भी आगे पानी आ गया है। इससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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दुकानों का आवंटन नहीं,शहर से सामान खरीद रहे कल्पवासी
माघ मेला क्षेत्र में अब तक दुकानों का आवंटन न होने से संतों और कल्पवासियों को रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। शिविरों में पहुंचे कल्पवासी आटा-दाल व अन्य वस्तुओं के लिए या तो झूंसी जा रहे हैं या फिर उन्हें दारागंज तक का सफर करना पड़ रहा है। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष डॉ प्रकाश चंद्र मिश्र ने मेला प्रशासन से काली, त्रिवेणी मार्गों पर शीघ्र दुकानों के आवंटन का आग्रह किया है, ताकि शिविरों में रहने वाले तीर्थयात्रियों को भटकना न पड़े।