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नागाओं की टोलियों के साथ निकली आनंद अखाड़े की पेशवाई, मंडलेश्वर नहीं हुए शामिल, देखें तस्वीरें

Sat, 05 Jan 2019 01:28 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Peshwai Anand Akhara
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संगम की रेती पर शुक्रवार को तपोनिधि श्री आनंद अखाड़ा के संत भी पहुंचे। आनंद अखाड़े की पेशवाई में भी नागाओं की टोलियों संग साधु, संत, श्रीमहंत, श्रद्धालु शामिल थे, लेकिन यह पहला ऐसा अखाड़ा रहा जिसकी पेशवाई में आनंद अखाड़े से कोई महामंडलेश्वर शामिल नहीं हुए। बीते दिनों आचार्य पद पर अभिषिक्त आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि जी महाराज के नेतृत्व में नागाओं की टोलियों संग पेशवाई संगम क्षेत्र स्थित छावनी पहुंची। प्रत्येक रथ के आगे बैंडबाजा वालों ने भजन, राष्ट्रीय गीत सुनाए।

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Peshwai Anand Akhara
दारागंज स्थित आनंद अखाड़े से आरंभ पेशवाई में इष्ट देव और आराध्य भगवान सूर्यदेव, निशान तथा नागा संन्यासियों की टोली संग निरंजनी की एकमात्र महामंडलेश्वर साध्वी मंदाकिनी गिरि के अतिरिक्त अष्टकौशल महंत नरेंद्र गिरि, श्रीमहंत रवींद्र पुरी, श्रीमहंत दिनेश गिरि, श्रीमहंत महेशानंद. श्रीमहंत आशीष गिरि आदि शामिल थे। वहीं पेशवाई में आनंद अखाड़े के सचिव शंकरानंद सरस्वती, महंत जगदीश गिरि, थानापति महंत राजेश्वरानंद, महंत लालतानंद गिरि, श्रीमहंत कालूगिरि, श्रीमहंत कैलाशपुरी, श्रीमहंत लक्ष्मण भारती, श्रीमहंत सूरतगिरि, श्रीमहंत धनराज गिरि, श्रीमहंत गणेशानंद, श्रीमहंत ओंकार भारती, श्रीमहंत तपन भारती, कारबारी गिरिजानंद सरस्वती, कारबारी सुरेश पुरी आदि ने मौजूदगी दर्ज कराई।

Peshwai Anand Akhara
धर्मध्वजा के करीब पहुंचकर श्रीमहंतों ने देवता को भेंट के रूप में ‘पुकार’ यानी भेंट चढ़ाई। सबसे ज्यादा आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि ने सर्वाधिक एक लाख इक्यावन हजार से पुकार कराई। इसी क्रम में महामंडलेश्वर साध्वी मंदाकिनी गिरि सहित अन्य श्रीमहंतों ने भी यथाशक्ति और श्रद्धापूर्वक गुरु महाराज को भेंट चढ़ाई। पूर्व सभापति श्रीमहंत ओंकार भारती को गोद में लेकर उनके शिष्य ने पुकार कराई। 

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पेशवाई के दौरान पूरे रास्ते वैसे खासकर दारागंज में पहुंचने पर स्थानीय निवासियों ने आचार्य, संतों-महंतों का माल्यार्पण करके स्वागत किया। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों की ओर से भी संतों का माल्यार्पण करके स्वागत किया गया। पूरे रास्ते नागा संन्यासियों ने गजब के करतब दिखाए। लोगों ने माल्यार्पण करके उनका भी स्वागत, अभिनंदन किया। संतों, नागाओं के लिए स्थानीय निवासियों ने रास्ते में जलपान की व्यवस्था भी की। 
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Peshwai Anand Akhara
तपोनिधि आनंद अखाड़ा की स्थापना विक्रम संवत 912 में बरार में की गई थी। इसके इष्टदेव सूर्य देव हैं। इसके संत महंत सनातन धर्म के प्रचार प्रसार एवं समाज रक्षा में निरंतर जुटे हैं। फिलहाल अखाड़े से आठ महामंडलेश्वर जुटे हैं लेकिन कोई महिला महामंडलेश्वर नहीं है।
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