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राम मंदिर को लेकर केंद्र सरकार की पहल पर संतों ने जताई असहमति, विहिप की धर्मसंसद से किया किनारा

Wed, 30 Jan 2019 05:13 PM IST
shubham न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने राम मंदिर मामले में केंद्र सरकार की पहल से असहमति जताई है। संतों ने कहा कि इस मामले में हो रही देरी किसी भी दृष्टि से क्षमा योग्य नहीं है। उनका कहना है कि अधिग्रहीत भूमि रामलला की है, ऐसे में वह भूमि किसी अन्य संस्था को नहीं बल्कि उन्हें ही मिलनी चाहिए।

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संतों ने दो टूक कहा कि राम जन्म भूमि मंदिर न्यास उसमें पक्षकार नहीं है, ऐसे में अधिग्रहीत भूमि को उसे देने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। संत यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने कहा कि उक्त भूमि रामलला की है, ऐसे में सरकार को उसे अधिग्रहीत करने का कोई अधिकार ही नहीं है। यह भी तय किया गया कि राम जन्म भूमि पर मंदिर संत ही बनाएंगे। ऐसे में अखाड़ा परिषद का विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद से कोई लेना-देना नहीं है, सो किसी भी अखाड़े का कोई भी प्रतिनिधि विहिप की धर्मसंसद में शामिल नहीं होगा।

संतों ने बैठक के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय से राम जन्मभूमि मंदिर मामले में किसी भी तरह की बाधा पहुंचाने वालों को फैसले के बाद आर्थिक रूप से दंडित किए जाने का प्रावधान बनाने की अपील की गई। सेक्टर तेरह, मुक्तिमार्ग स्थित वयोवृद्ध संत महात्यागी सेवादास जी महाराज के शिविर में उन्हीं की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, उपाध्यक्ष निर्मल अखाड़े के सचिव महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, निर्वानी अनी अखाड़े के श्रीमहंत धर्मदास सहित सभी अखाड़ों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
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निर्वानी अनी अखाड़े की पहल पर ही संत महात्यागी सेवादास जी महाराज के शिविर में रामजन्म भूमि मामले की बाधाएं दूर करने के लिए 31 जनवरी से दो फरवरी तक महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।

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