राम मंदिर के सवाल पर बाबा बोले, राम मंदिर बनना ही चाहिए। इस मुद्दे पर सरकार को पहल करनी होगी। सरकार को भूमि का अधिग्रहण करके हिंदू समाज को सौंप देना चाहिए। इसके अलावा कोई और रास्ता ही नहीं है। इस मुद्दे पर जल्द ही र्कोई निर्णय आने की संभावनाएं कहीं दूर-दूर तक नहीं दिख रही हैं। राम मंदिर भी बनना चाहिए और भारत के लोगों का चरित्र भी सीता-राम जैसा होना चाहिए। रामराज्य यानी संपन्नतायुक्त, वैभवयुक्त राष्ट्र भी बनना चाहिए जहां गरीबी, महंगाई भूख, बेरोजगारी जैसा कोई अभाव, भेदभाव न हो। ऐसा राष्ट्र बने जिसमें सबकी समृद्धि हो, सब में सद्भाव हो। पूरी तरह से जागृत हो जाएं तो पांच लाख से ज्यादा साधु-संत देश की दिशा बदल सकते हैं। जहां तक काले धन का सवाल है, यह मुद्दा मोदी जी पर छोड़ चुके हैं, फिलहाल वह काले मन को ठीक करने में लगे हैं क्योंकि वह भी देश के लिए उतना ही जरूरी है। काले धन का मुद्दा हमने भुलाया या विस्मृत नहीं किया है। यह मुद्दा आज भी है।
योग ही भारतीय संस्कृति का मूल अमृत है, उसका पान करके ही रोगों पर विजय मिलेगी, मृत्यु पर विजय पाएंगे, दुर्बलताओं, पराधीनताओं पर भी विजय पाएंगे। और यह कुंभ, यह तो हमारे धर्म अध्यात्म, संस्कृति का संगम है। कुंभ हमारी करोड़ों वर्ष पुरानी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान का संगम है। कुंभ मंथन का पर्व है। यहां ज्ञानमृत है, यहां योगामृत हैं, यहां जीवन के सारे अमृत का पान करते हैं। समुद्र मंथन प्रतीकात्मक है, यहां का ज्ञानामृ़त है, जीवन का अमृत व्यावहारिक है। सुखद है कि योगी सरकार ने कुंभ को बहुत गौरव दिया है। यहां भारत को हिंदू राष्ट्र, आध्यात्मिक राष्ट्र बनाने के लिए हमारे साधु-महात्मा पुरुषार्थ कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि प्रयागराज के कुंभ से देश को एक नई दिशा मिलेगी।