अध्यात्म की नगरी में सियासी आशीर्वाद देने की परंपरा शुरू हो गई है। यहां पर राजनीति लाभ के लिए अध्यात्म के अखाड़े में सत्ता पक्ष और विपक्ष नेताओं की कड़ी जुड़ने लगी है। राजनेताओं के साथ बैठक कर राजनीति दिशा को साधा जाने लगा है। जिसकी शुरुआत भाजपा के मंत्री और विधायक ने मेला के आरंभ होते ही कर दी थी। अब विपक्ष भी पीछे नहीं है। सपा-कांग्रेस से जुड़े राजनीति दल संतों महंतों का आशीर्वाद लेने में जुट गए हैं।
कुंभ 2019 से लोकसभा चुनाव को साधने का मंत्र भाजपा ने पहले ही गढ़ लिया था। इस चरितार्थ करने के लिए दिव्य कुंभ और भव्य कुंभ का नाम दिया गया। बकायदे इसकी आड़ में प्रोजेक्टर और होर्डिंग्स मोदी-योगी मेला में छाए हैं। इसमें भाजपा के नेताओं के आने का सिलसिला शुरु हो गया। जो थमा नहीं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के साथ इसका आगाज हो गया। इसी क्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहलाल खट्टर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत सहित कैबिनेट मंत्रियों के आने-जाने का तांता लगा हुआ है।
जिसमें विदेश मंत्री वीके सिंह, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता, श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी, नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य सहित भाजपा के बड़े मंत्री व्यवस्था के नाम पर अखाड़ों के महंतोंं का आशीर्वाद लेते रहे हैं। इनका जमावड़ा कभी धर्मसंसद में शामिल होने के नाम पर हो रहा या फिर मां गंगा मैया दर्शन नाम पर हो रहा है। इसमें अधिकतर सिर्फ मां गंगा का आचमन कर महंतों के अखाड़ों शिविरों में जाकर लंबा समय बीता रहे हैं।