कुंभ के तीसरे शाही स्नानपर्व वसंत पर डुबकी लगाने के बाद अखाड़ों की छावनी में भी चलाचली की बेला आ गई। शाही स्नान के बाद अब काशी की रवानगी की तैयारी है। परंपरा
के मुताबिक डुबकी लगाकर लौटे अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडलेश्वर, श्रीमहंतों ने अखाड़े की धर्मध्वजा के नीचे ‘पुकार’ करके गुरु महाराज के चरणों में भेंट अर्पित की।
अखाड़ों की छावनी में ‘कढ़ी-पकौड़ी’ का भोजन प्रसाद भी बना। संतों ने साथ बैठकर एक पंक्ति में भोजन और कुंभ पर्व की कुशलता के लिए आशीष मांगा। अखाड़ों की विदाई की तैयारियां आरंभ हो गई हैं, तकरीबन एक सप्ताह के भीतर शैव अखाड़े काशी पहुंच जाएंगे।पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के अष्टकौशल महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा, काशी रवानगी से पहले अखाड़े की छावनी में ही पंचों की सहमति से कार्यकारिणी बदली जाएगी।
13 फरवरी को ही अष्टकौशल के नए महंत और कारबारियों का चुनाव किया जाएगा। यह नई कार्यकारिणी ही काशी की जिम्मेदारी संभालेगी। चौदह फरवरी को औपचारिक रूप से ‘चांदना’ के तहत नए अष्टकौशल महंत, कारबारियों का तिलक चंदन करके अभिषेक किया जाएगा। वहीं पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की छावनी में तीसरे शाही स्नान के बाद नई कार्यकारिणी का चुनाव किया जाएगा। महानिर्वाणी सहित अन्य अखाड़ों की छावनी में भी ‘कढ़ी पकौड़ी’ का प्रसाद बांटा गया।