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कुंभ 2019: प्रथम शाही स्नान से पहले खुलेगा मूल अक्षयवट, लगाए जाएंगे उच्च क्षमता वाले कैमरे

Fri, 28 Dec 2018 12:43 AM IST
Pranjal Dixit अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
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मूल अक्षयवट - फोटो : अमर उजाला
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मूल अक्षयवट की हर गतिविधि करीब चालीस फीट की वीडियो वॉल पर लाइव दिखेगी। पवित्र जड़ों के दर्शन के लिए प्रवेश करते ही हर व्यक्ति पांच सौ मीटर दूर मेला क्षेत्र में लगी वीडियो स्क्रीन पर नजर आने लगेगा। अपराधी या संदिग्ध व्यक्ति मूल अक्षयवट में घुसते ही आसानी से चिह्नित कर पकड़े जा सकेंगे। इसके लिए जीटीजेड और एनपीआर समेत उच्च क्षमता वाले चार तरह के कैमरे लगाए जा रहे हैं। सेना की चौकसी वाले अकबर के किले की सुरक्षा मूल अक्षयवट में आम श्रद्धालुओं को पहली बार प्रवेश दिए जाने की वजह से और मजबूत की जा रही है। कैमरा लगाने की जिम्मेदारी एल एंड टी को सौंपी गई है। 

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अकबर के किले में मूल अक्षयवट का हर कोना वीडियो स्क्रीन पर लाइव होता रहेगा। बेहद कड़े और पुख्ता सुरक्षा मानकों पर आधारित 19 कैमरे मूल अक्षयवट से लेकर सरस्वती कूप तक लगाए जाएंगे। इसमें एनपीआर कैमरा, जीटीजेड कैमरा, एचडी कैमरा और फिक्स कैमरा शामिल है। जीटीजेड कैमरे मूल अक्षयवट में 360 डिग्री पर घूमते रहेंगे, ताकि हर संदिग्ध व्यक्ति और वस्तु पर नजर रखी जा सके। इस कैमरे की मदद से संदिग्ध व्यक्तियों को चिह्नित करना और पकड़ना आसान होगा।

इसके अलावा एनपीआर और एचडी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। डीआईजी कुंभ मेला कवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मूल अक्षय वट की अभेद्य सुरक्षा की जा रही है। आम श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मूल अक्षयवट में लगने वाले उच्च क्षमता वाले कैमरों का मॉनीटर सवा सौै करोड़ रुपये की लागत से बने इंट्रीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर से जुड़ा होगा। इसके लिए आईसीसीसी में अलग के सब सेंटर स्थापित किया जा रहा है। कैमरा लगते ही जल्द ही किले की गतिविधियां वीडीयो वॉल पर दिखने लगेंगी। 

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दो जनवरी तक मूल अक्षयवट में दर्शन की तैयारी होगी पूरी  

अकबर के किले में स्थित मूल अक्षयवट के दर्शन के लिए अवस्थापना सुविधाओं का काम दो जनवरी तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। किले के पूर्वी गेट के पास मूल अक्षयवट के मुख्य प्रवेश द्वार को बनाने का काम बृहस्पतिवार को शुरू कर दिया गया। रैंप, बैरीकेडिंग के अलावा अन्य कामों को जल्द फिनिशिंग लाइन तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया है। दो जनवरी को सेना के शीर्ष अफसरों की टीम किले में मूल अक्षयवट के दर्शन की तैयारियों का अंतिम रूप से निरीक्षण करेगी। इसके बाद मूल अक्षयवट को खोलने का निर्णय ले लिया जाएगा। 

कुंभ के प्रथम शाही स्नान से पहले खुलेगा मूल अक्षयवट
कुंभ के प्रथम शाही स्नान मकर संक्रांति से पहले देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मूल अक्षयवट को खोल दिया जाएगा। प्रधानमंत्री के एलान के बाद अकबर के ऐतिहासिक किले में लंबे समय से बंद अक्षयवट तक जाने के लिए रास्ता बनाने का काम शुरू हो गया है। करीब 435 वर्ष पुराने इस किले की पूर्वी हिस्से की दीवार को खोलकर अक्षयवट तक जाने का रास्ता बनाया जाएगा। दीवारकिनारे के गड्ढों को भरने के साथ ही बैरीकेडिंग कराई जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन कराया जा सके।
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एमएनआईटी के विशेषज्ञों की परीक्षण रिपोर्ट पर अक्षयवट का रास्ता खोलने पर बनी सहमति

मूल अक्षयवट तक श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास का रास्ता तय कर लिया गया है। किले के पूर्वी द्वार से प्रवेश के बाद स्थित मंदिर केपास से दीवार खोलकर भीतर जाने का नया रास्ता बनाया जाएगा। किले की दक्षिणी दीवार के किनारे से ही श्रद्धालु अक्षय वट तक पहुंचेंगे। डीआईजी कुंभ मेला केपी सिंह के अनुसार पीएम की घोषणा के बाद मूल अक्षयवट तक श्रद्धालुओं के प्रवेश का खाका तैयार कर लिया गया है। इसके लिए सेना, प्रशासन और पुलिस के अफसरों की एक दौर की समन्वय बैठक हो चुकी है। 

एक उच्चाधिकारी ने बताया कि पीएमओ से अक्षयवट खोलने के संकेत मिलने के बाद पिछले नवंबर से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। 1583 में निर्मित इस किले के भीतर स्थित आयुध भंडार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अक्षयवट के दर्शन की व्यवस्था बनाई जा रही है। श्रद्धालु पहले अक्षयवट जाएंगे। इसके बाद पालातपुरी में स्थित अन्य देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों की मूर्तियों के दर्शन करते हुए सरस्वती कूप के  दर्शन कर किले के पश्चिमी हिस्से में स्थित द्वार से त्रिवेणी मार्ग से होकर बाहर निकलेंगे। मकर संक्रांति के प्रथम शाही स्नान से पहले मूल अक्षयवट को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।

अकबर के किले में स्थित पवित्र अक्षयवट खोलने के लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर एमएनआईटी के चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल की ओर से स्ट्रेंथ परीक्षण कराया गया है। स्ट्रक्चर विभाग के एलके मिश्र के अलावा डॉ. कुमार वेंकटेश, डॉ. विजय कुमार समेत चार विशेषज्ञों ने किले की दीवार के पास ड्रिलिंग कराकर भीतर की मिट्टी की स्थिति और भार सहन करने की क्षमता का परीक्षण किया गया है। एमएनआईटी के निदेशक प्रो. राजीव त्रिपाठी ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि शीर्ष अफसरों का जोर था कि जल्द परीक्षण रिपोर्ट दी जाए। इसे देखते हुए विशेषज्ञों ने किले की प्राचीनता और प्रस्तावित मार्ग पर भीड़ के दबाव के सहन करने की क्षमता का आकलन कर रिपोर्ट दे दी गई है। इस रिपोर्ट के अलावा सेना के भी इंजीनियरिंग विभाग ने किले की दीवार का परीक्षण कराया है। स्ट्रेंथ परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही अक्षयवट जाने के लिए नया मार्ग खोलने पर सहमति बनाई जा सकी।
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