टूटी हुई मोबाइल स्क्रीन, दो हेलमेट, बैग में कुछ जरूरी सामान, दो बोतल पानी और एक छाता लेकर केए-09 एक्स 6143 नंबर की 25 साल पुरानी बजाज चेतक स्कूटर से कृष्ण अपनी मां को दुनिया दिखाने निकले हैं। इस यात्रा को उन्होंने मातृ सेवा संकल्प यात्रा नाम दिया है। जिसके तहत अभी तक वह 66 हजार 889 किमी. की दूरी तय कर तीन देशों की यात्रा पूरी कर चुके हैं।
कभी कृष्ण ने बाललीला के दौरान मुंह में मां यशोदा को ब्रह्मांड के दर्शन कराए थे। अब मैसूर के कृष्ण कुमार अपनी मां को स्कूटर से दुनिया दिखाने निकले हैं। उनकी मातृ सेवा संकल्प यात्रा का पड़ाव संगमनगरी में पड़ा है। यहां आकर उन्होंने मां को संगम स्नान कराने के बाद यहां के मंदिरों के दर्शन कराए। 44 वर्षीय कृष्ण कुमार अपनी 74 वर्ष की मां चूड़ा रत्नम्मा को लेकर मुठ्ठीगंज स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम में रुके हुए हैं।
लॉकडाउन में भूटान सीमा पर फंसे रहे
अनुभव साझा करते हुए कृष्ण कुमार ने बताया लॉकडाउन के दौरान वह मां के साथ यात्रा पर थे। भूटान सीमा पहुंचे तो पता चला सीमाएं सील हैं। कोरोना के उस दौर में एक माह 22 दिन उन्होंने भारत-भूटान सीमा के जंगलों में गुजारे। इसके बाद जब उनका पास बना तो एक सप्ताह में 2673 किलोमीटर स्कूटर चलाकर वापस मैसूर आ गए। सब कुछ सामान्य होने के बाद 15 अगस्त 2022 से उन्होंने दोबारा यात्रा शुरु की है।
व्यक्ति के न रह जाने पर इज्जत देने का क्या मतलब
यात्रा के पीछे की प्रेरणा के बारे में वह बताते हैं कि जब लोग दुनिया से अंतिम विदा ले लेते हैं तो उनकी फोटो पर माला चढ़ाकर मृतक की इच्छाओं के बारे में बाते करते हैं, उन्हें याद करते हैं। जबकि रिश्तों को, व्यक्तियों का खयाल जीते जी रखना चाहिए। मैं यह मलाल लेकर नहीं जीना चाहता था। इसलिए पिता के गुजर जाने के बाद मां को अकेला छोड़ने की बजाय उन्हें दुनिया दिखाने का निर्णय किया और यात्रा पर निकल पड़े।