रिटायर्ड जिला जज हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए बनी कोलेजिएम प्रणाली के औचित्य पर मंथन करेंगे। रिटायर्ड जिला जज वेलफेयर एसोसिएशन की हाल ही में हुई बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा गया। हालांकि इस पर विस्तृत चर्चा 15 अक्तूबर को होने वाली बैठक में होगी। एसोसिएशन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने का भी संकल्प लिया है। छोटे-मोटे विवादों या पति-पत्नी के बीच के झगड़े का निपटारा रिटायर्ड जिला जज कराएंगे। इससे मध्यस्थता केंद्रों में होने वाले समझौतों और निर्णयों में अधिक धार और स्पष्टता आएगी। साथ गरीब वादकारियों बेहतर विधिक सहायता भी उपलब्ध हो सकेगी।
एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी सेवा निवृत्त जिला जज एसके श्रीवास्तव ने बताया कि रविवार को हुई बैठक में तय किया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत संचालित मेडिएशन सेंटर और प्री लिटिगेशन के मामलों में वादकारियों को कानूनी उपचारों की जानकारी देकर विधिक सहायता करेगें। इसके लिए जिला जज से वार्ता करेगें। यह भी बताया गया कि हाईकोर्ट ने परिपत्र जारी कर सेवा निवृत्त जिला जजों से सहायता लेने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों से कहा है। बैठक में सेवा निवृत्त जिला जज सीडी राय, पीडी कौशिक और जीएस सिन्हा उपस्थित रहे है। बैठक रिटायर्ड जज हरिश्चंद्र सक्सेना की अध्यक्षता में हुई।
उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में परिवार समझौता केंद्रों में अधिकतर बेंच वकीलों की है। रिटायर्ड जिला जजों की मदद यदि इसमें मिलती हैं तो इसके बेहतर परिणाम आने की उम्मीद है। जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र का कहना है कि रिटायर्ड जिला जजों के अनुभव का विधिक सहायता के लिए बेहतर उपयोग हो सकता है। यह काफी सराहनीय निर्णय है।