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गंगा तट पर कांवरियों का हूजूम उमड़ा

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कांवड़िये बन आए, छाए ‘शिव के गण’
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0 दूसरे सोमवार से पहले घाटों पर बढ़ी कांवड़ियों की संख्या
प्रयागराज। सावन के दूसरे सोमवार को विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक के लिए दो दिन पहले शनिवार को ही दारागंज के दशाश्वमेेध घाट पर कांवड़ियों की जमावड़ा रहा। अलग-अलग क्षेत्रों से टोलियों में आए कांवड़ियों का उत्साह ऐसा रहा कि बारिश के बावजूद वह मस्ती में नाचते-गाते हुए जल भरने के लिए जाते और लौटते रहे।
तरह-तरह के कावंड़ियों के बीच भोले और उनके गणों का रूप धरे भक्तों की टोली भीड़ से अलग सभी के आकर्षण का केंद्र बनी रही। तरह-तरह के गणों के रूप में सभी भोले के गीतों पर मगन होकर नृत्य करते रहे। पास जुटे अन्य कावंड़िये भी उन्हीं के रंग में रंग तालियां बजाते, नाचते उनका हौसला बढ़ाते रहे। वहीं भोले के अतिरिक्त मोदी और योगी के चित्रों वाली कांवड़ियों की टीशर्ट उन्हें भीड़ से अलग करती है।
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माघ मेले के बाद कांवड़ियों की आमद से दारागंज दोबारा गुलजार है। ‘बोल बम का नारा है बाबा तेरा सहारा है बोल बम, बोल बम’ के साथ हर तरफ दारागंज में भगवा रंग छाया रहा। बोल बम के साथ कांवड़ियों के बीच नए-नए नारे, नए-नए मंत्र भी प्रचलित हैं। कांवड़ यात्रा चलने पर सभी जोरदार बोल बम का नारा लगाते हैं, अपनी अलग पहचान के लिए अपनी वेशभूषा और नारों में होड़ मची हुई है।
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कम नहीं हो रही कांवड़ियों की मुसीबत
प्रयागराज। सावन के दूसरे सोमवार के पहले दारागंज के दशाश्वमेध घाट पर कांवड़ियों के जत्थों के आने का क्रम तेज हुआ। लेकिन, जल भरने के लिए जाने और लौटने में उन्हें परेेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के बाद घाट वाले रास्ते में कीचड़ ही कीचड़ के कारण फिसलन बढ़ गई है। शनिवार को भी कई कावंड़िये फिसल कर गिरे।
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फोटो 141 सहित कॉलम
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भोले के भक्त
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परिवार संग जल भरकर
जाते हैं विश्वनाथ के धाम
कांवड़ियों पर आस्था का अजब रंग चढ़ा है। लेकिन, फूलपुर से परिवार के साथ आए बृजेश कुमार की एक मनौती पूरी हुई, उसके बाद तो उन्होंने नियमित रूप से बाबा के धाम जाने का संकल्प ले लिया। पूरे वर्ष सावन की प्रतीक्षा रहती है। सावन के दूसरे सोमवार के बाद वह प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पर जल भरने को आते हैं। यहां से जल भरकर बृजेश पूरे परिवार के साथ वाराणसी स्थित बाबा विश्वनाथ को जल चढ़ाने के लिए जाते हैं। परिवार में छोटेे-छोटे बच्चे भी हैं लेकिन सभी आस्था से ओतप्रोत हैं। बृजेश कहते हैं, पूरा परिवार कांवड़ यात्रा के लिए उत्साहित रहता है, इसीलिए अब कई वर्षों की साधना के बाद अभ्यास हो गया है।
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फोटो 140 सहित कॉलम
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संगमनगरी के शिवालय
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बैरहना सर्वेश्वर महादेव
मंदिर पांच सौ वर्षों पुराना
बैरहना में निंबार्क आश्रम परिसर में स्थित श्री सर्वेश्वर महादेव जी का प्राचीन शिवालय है । प्राचीन कलाकृतियों से युक्त यह शिवालय तकरीबन पांच सौ बरस प्राचीन माना जाता है। इसकी स्थापना बाबा ठाकुर दास ने की थी। महंत स्वामी राधा माधव दास जी की देखरेख में संचालित मंदिर नर्मदेश्वर शिवलिंग है। व्यवस्थापक लक्ष्मीकांतम कहते हैं, पूरे सावन में शिवजी का रुद्राभिषेक तथा नियमित रूप से प्रत्येक शाम फूलों से अनुपम शृंगार किया जाता है। प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजा अर्चना के साथ भजन संध्या भी होती है।

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