पानी की बौछार पर और भड़की आग
विस्फोट के बाद चौतरफा लगी आग पर काबू पाने में घंटों का समय लगने का एक कारण फैक्ट्री में भारी मात्रा में केमिकल स्टोर किया जाना भी रहा। दरअसल मौके पर पहुंचे फायरब्रिगेड कर्मचारियों ने तत्काल पानी की बौछार डालकर आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू की। हालांकि तब तक काफी मात्रा में केमिकल फैक्ट्री में फैल चुका था। इसके बाद आग बुझाने के लिए फोम मंगाया गया। फोम आने के बाद आग बुझाने पर प्रभावी तरीके से काबू पाने का काम शुरू हो सका।
सात फायर टेंडरों से पांच घंटे चला ऑपरेशन
विस्फोट के बाद पटाखा फैक्ट्री में लगी आग पर काबू पाने में कुल पांच घंटे का समय लगा। इस दौरान सात फायर टेंडरों से लगातार राहत कार्य किया गया। इनमें से चार फायर टेंडर कौशाम्बी जबकि एक फायर टेंडर फतेहपुर व दो फायर टेंडर प्रयागराज से मंगाए गए थे। मुख्य अग्निशमन अधिकारी डॉ. राजीव पांडेय ने बताया कि फायर ब्रिगेड की अलग-अलग टीमों ने दोपहर 12 से शाम पांच बजे तक लगातार पांच घंटों तक ऑपरेशन चलाया और तब जाकर आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
क्यों रखे थे एलपीजी सिलेंडर?
घटना के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या फैक्ट्री में एलपीजी सिलेंडर भी इस्तेमाल में लाए जा रहे थे। दरअसल सूत्रों का कहना है कि राहत कार्य के दौरान फैक्ट्री के भीतर एलपीजी सिलेंडर के अवशेष भी मिले। यही नहीं कुछ एलपीजी सिलेंडर भी पाए गए हैं। गनीमत यह रही कि राहत कार्य के दौरान इन सिलेंडरों में विस्फोट नहीं हुआ। वरना नुकसान और ज्यादा हो सकता था।