लगभग चार साल चले ट्रायल के बाद अदालत ने गत 18 अगस्त को निर्णय सुरक्षित कर लिया था। फैसला सुनाने के लिए के लिए बृहस्पतिवार को एडीजे बद्री विशाल पांडेय दिन में दो बजे अदालत पहुंचे। उस वक्त तक करवरिया बंधुओं को जेल से लाकर अदालत में पेश किया जा चुका था। पूरा कोर्टरूम वकीलों से खचाखच भरा था।
कोर्ट में पहुंचते ही जज ने कहा कि अभियोजन अपना पक्ष साबित करने में सफल रहा। सभी अभियुक्तों को दोषी सिद्ध करार दिया जाता है। इतना सुनते ही पूरे न्यायकक्ष में सन्नाटा छा गया।
एडीजे बद्री विशाल तत्काल उठकर अपने चैंबर में चले गए। लगभग दस मिनट बाद वह वापस लौटे और फैसले की प्रति पर अभियुक्तों के हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद उन्होंने कहा कि सजा के बिंदु पर चार नवंबर को सुनवाई की जाएगी। इसके बाद सजा की मात्रा पर फैसला होगा।
कोर्ट से बाहर आता रामचंद्र उर्फ कल्लू
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अदालत का फैसला सुनते ही समर्थक भावुक हो गए। शायद इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। कुछ लोग रोने भी लगे, हालांकि बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने करवरिया बंधुओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हम हमेशा आप के साथ रहेंगे। समर्थकों ने कुछ देर तक अदालत के बाहर नारेबाजी भी की।
इन धाराओं में किया दोष सिद्ध
1- 147 आईपीसी- बलवा
2- 148 आईपीपी- घातक आयुध के साथ बलवा
3- 149 आईपीसी- समान आशय के लिए विधि विरुद्ध जमाव
4- 302 आईपीसी- हत्या
5- 307 आईपीसी- हत्या का प्रयास
6- 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट
कोर्ट से बाहर आते पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया
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जवाहर यादव उर्फ पंडित की हत्या 13 अगस्त 1996 को शहर के सिविल लाइंस इलाके में कर दी गई थी। उस वक्त शाम के करीब साढ़े छह बजे थे। जवाहर यादव अपनी मारुति 800 कार से लाउदर रोड स्थित कार्यालय से अशोक नगर अपने घर जा रहे थे। हमलावर एक मारुति वैन में सवार थे। सभी एके-47 और अन्य घातक असलहों से लैस थे।
जवाहर के भाई सुलाकी यादव ने करवरिया बंधुओं पर हत्या करने का आरोप लगाते हुए सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना की जांच शुरू में सिविल लाइंस पुलिस ने और उसके बाद सीबीसीआईडी की इलाहाबाद, लखनऊ और वाराणसी शाखा से कराई गई।
सीबीसीआईडी के आरोपपत्र दाखिल करने के बाद हाईकोर्ट के स्थगनादेश के चलते मुकदमे की कार्रवाई पर काफी समय तक रोक लगी रही। 2015 में हाईकोर्ट का स्थगन आदेश समाप्त होने के बाद इस मुकदमे में सुनवाई प्रारंभ हुई। उसी समय करवरिया बंधुओं को सरेंडर कर जेल जाना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण में त्वरित सुनवाई करने और अनावश्यक तारीख है ना लगाने का आदेश दिया था। लगभग 4 वर्ष चली नियमित सुनवाई के बाद अदालत ने गत दिनों अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था, इसे सुनाए जाने के लिए 31 अक्तूबर की तिथि नियत की गई थी।