प्रयागराज। विधायक जवाहर पंडित हत्याकांड में विवेचना के दौरान लापरवाही बरतने पर यद्यपि रिटायर्ड डीएसपी प्रदीप कुमार वर्मा पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, लेकिन आरोपियों का बचाने को प्रयास दो अन्य विवेचकों ने भी किया था। मामले में पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, पूर्व विधायक उदयभान, सूरजभान व रामचंद्र आरोपी बनाए गए थे। चारों आरोपियों को सजा सुनाने वाली इलाहाबाद की सत्र अदालत ने घटना को लेकर लापरवाहीपूर्ण विवेचना करने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने माना कि अभियुक्तों के प्रभाव में आकर उनको बचाने के लिए विवेचकों ने न केवल मिथ्या साक्ष्य गढ़ने का प्रयास किया, बल्कि बचाव पक्ष की तरफ से गवाह भी बन गए।
वर्ष 1996 में 13 अगस्त को सिविल लाइंस में सपा विधायक जवाहर पंडित की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी। हत्या में एके 47 जैसे अत्याधुनिक असलहों का प्रयोग किया गया। इस हत्याकांड में पूर्व बसपा सांसद कपिलमुनि करवरिया, पूर्व भाजपा विधायक उदयभान करवरिया और पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया के साथ ही उनके रिश्तेदार रामचंद्र उर्फ कल्लू पर मुकदमा चला और अदालत ने उनको उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार वर्मा, पीएन निगम और लक्ष्मण राय को सौंपी गई थी।
विवेचक प्रदीप कुमार ने जवाहर हत्याकांड की थ्योरी बनारस में हुए शराब व्यवसायी जवाहर जायसवाल की हत्या के प्रयास से जोड़ने की कोशिश की। कहा गया कि जवाहर जायसवाल पर हमला करने वाले शूटर ही जवाहर पंडित की हत्या में शामिल थे। दोनों घटनाओं में एक ही प्रकार के असलहे प्रयोग किए गए थे। विवेचक ने जवाहर जायसवाल मामले में जेल में बंद अभियुक्त मायाशंकर के बयान के हवाले से यह साबित करने की कोशिश की थी कि जवाहर यादव की हत्या मायाशंकर, बंशी सिंह, पांचू सिंह और हरिहर सिंह ने की थी, क्योंकि जवाहर जायसवाल पर हमले के बाद जवाहर यादव ने बनारस जाकर इन लोगों को धमकी दी थी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में विवेचक बचाव पक्ष से किस तरह से प्रभावित है, इसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने बचाव पक्ष की ओर से आकर गवाही भी दी है।
इसी प्रकार से पीएन निगम और लक्ष्मण राय पर कोर्ट ने कूटरचित फैक्स तैयार कर अभियुक्तों का बचाव करने की कोशिश की निंदा की। बार-बार जांच बदलने और इसकी दिशा भटकाने के लिए अदालत ने अपने फैसले में सीबीसीआईडी के उन विवेचकों पर न सिर्फ कड़ी टिप्पणी की, बल्कि तीनों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का एसएसपी प्रयागराज को निर्देश भी दिया। मामले में सिर्फ प्रदीप कुमार वर्मा के खिलाफ मुकदमा कायम किया गया है, जबकि अन्य दोनों विवेचकों पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है।