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गरीब की झोपड़ी बचाने आधीरात क्यों नहीं बैठतीं अदालतें: जस्टिस अग्रवाल

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Justice Sudhir Aggrawal speech in highcourt - फोटो : CITY DESK
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भारतीय संविधान के 70 वर्ष, लोकतंत्र की सफल यात्रा पर संगोष्ठी में वरिष्ठ न्यायमूर्ति ने बताईं लोकतंत्र की विसंगतियां
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न्यायमूर्ति बोले- जिस दिन कलेक्टर और चपरासी का बेटा एक ही स्कूल में पढ़ेगा तभी संविधान सही मायने में सफल
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा है कि हमें यह समझने की जरूरत है कि भारत के लोकतंत्र में वास्तविक भागीदारी किसकी है। देश का गरीब आदमी जो वोट देकर सरकार चुनता है, मगर उसका दोहन वे लोग करते हैं जो वोट देने नहीं जाते। उन्होंने कहा कि यह देश का वह 80 प्रतिशत तबका है, जो सरकार तो बनाता है मगर न तो सरकार चलाने में उसकी कोई भागीदारी है और न ही सरकारें उसके लिए कुछ करती हैं। उन्होंने कहा कि हम बड़े लोगों के लिए रात में भी अदालतें खोलते हैं, लेकिन आज तक किसी गरीब की झोपड़ी गिरने से बचाने के लिए आधीरात को अदालत नहीं खुली।
जस्टिस सुधीर अग्रवाल यंग लॉयर्स एसोसिएशन हाई कोर्ट द्वारा शनिवार को आयोजित संगोष्ठी ’भारतीय संविधान के 70 वर्ष, लोकतंत्र एक सफल यात्रा’ विषय पर मुख्य अतिथि के तौर पर अधिवक्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को वास्तव में उन लोगों ने बनाया है, जिनको हमने हाशिए पर रखा। जब हम उन 80 प्रतिशत लोगों के लिए भी वही शिक्षा, चिकित्सा सुविधा और वही सभी नागरिक सुविधाएं मुहैया कराएंगे जो हम अपने खुद के लिए चाहते हैं और जिस दिन कलेक्टर तथा चपरासी का बेटा एक साथ एक स्कूल में पढ़ने लगेंगे उस दिन संविधान सही मायने में सफल होगा।
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जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने भारत में संविधान के निर्माण से लेकर आज तक पड़ावों को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संविधान के लागू होने से लेकर ही न्यायपालिका और विधायिका में एक प्रकार की खींचतान रही है जो समय-समय पर उजागर होती रही है।
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