प्रयागराज। हस्तकला संग लोक संगीत का अनूठा समन्वय एनसीजेडसीसी के राष्ट्रीय शिल्प मेले का आकर्षण बन गया है। मंगलवार की शाम सूफी गायन के साथ कथक की जुगलबंदी ने हर किसी का मन मोहा। लोकनृत्यों -गीतों की प्रस्तुतियों के जरिए कलाकारों ने तीसरी सांस्कृतिक निशा को ऊंचाई प्रदान की।
एनसीजेडसीसी परिसर में यूपी, पंजाब, उड़ीसा, मप्र, राजस्थान, बिहार के अलावा पूर्वोत्तर के कश्मीर, गुजरात, उत्तराखंड के हस्तनिर्मित उत्पादों के स्टालों पर मंगलवार को शहर की महिलाओं की भीड़ देखते बनी। उत्तरी लॉन में कतारबद्ध स्टालों पर लोगों ने अलग-अलग राज्यों के मशहूर व्यंजनों के स्वाद का लुत्फ उठाया। इस शिल्प मेले में सर्दी के ऊनी वस्त्रों की वैराइटी लोगों को खूब आकर्षित कर रही है। सिल्क व कॉटन के कपड़े भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। शाम 5:30 बजे के बाद संगीत निशा में लोकनृत्य व गायन की प्रस्तुतियों पर लोग झूमते रहे। मध्य प्रदेश के देवास से आए दयाराम सारोलिया ने निर्गुण भजन से लोगों को भक्तिभाव में सराबोर किया। मन मस्त भया फिर क्या बोले... जरा हल्के गाड़ी हांको, मेरे राम गाड़ी वाले ... जैसे भजन खूब सराहे गए। इनके बाद रूहानी सिस्टर्स ने सूफी गायन से मंत्रमुग्ध किया। मन कुंतो मौला... अंखिया उड़ीक दिया... की प्रस्तुति से उन्होंने वाहवाही बटोरी। दमादम मस्त कलंदर... के बाद आज रंग है ...भर दो झोली...की प्रस्तुतियां भी यादगार रहीं। रूहानी सिस्टर्स के गायन पर कथक नृत्यांगना विधा लाल ने भावपूर्ण नृत्य से लोगों का दिल जीता। विधा लाल ने लयात्मकता के नृत्य के भावों का मोहक समन्वय किया। इनके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, मणिपुर, असम, मिजोरम केपारंपरिक लोकनृत्य पेश किए गए।
वासवती का कथक नृत्य आज
शिल्प मेले के मुक्ताकाशीय मंच पर बुधवार की शाम दिल्ली की वासवती मिश्रा का कथक नृत्य होगा। मणिपुर, राजस्थान, उड़ीसा, असम व गुजरात के लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां यादगार होंगी।