याची की ओर से कहा गया कि YEIDA को करोड़ों का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। 31 जुलाई 2017 तक 359.81 करोड़ रुपये बकाया था। कहा गया कि भूमि पर पहले ही पर्याप्त रूप से विकास किया गया था। इसीलिए संपूर्ण लीज डीड को रद्द करने का YEIDA निर्णय मनमाना और अनुपात हीन था। सुनवाई के दौरान याची की ओर से समग्र समाधान प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।
सुझाव दिया गया कि याचिका लंबित रहने के दौरान 150 हेक्टेयर भूमि जेपी को बेचने के लिए वापस दे दी जाए और ऐसी बिक्री से प्राप्त धन को YEIDA को हस्तांतरित कर दिया जाए। शेष राशि न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय आने तक सुरक्षित रखा जाए। याची को ऋण प्रदान करने वाले बैंकों के संघ ने निस्तारण प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की थी। याची के वकील ने आरोप लगाया कि YEIDA किसानों को भुगतान किए जाने वाले अतिरिक्त मुआवजे पर अतिरिक्त ब्याज वसूलने की कोशिश कर रहा है। उसने किसानों को कोई ब्याज नहीं दिया था।
जवाब में YEIDA के अधिवक्ता ने कहा कि आज तक किसानों को अतिरिक्त मुआवजे पर कोई ब्याज नहीं दिया गया है। भविष्य में ऐसा हो सकता है। क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। याची की ओर से प्रस्तावित समझौते को YEIDA की ओर से स्वीकार नहीं किया गया। इसके बदले में 10 प्रतिशत ब्याज की मांग की गई। न्यायालय ने कहा कि मामले में तीन वर्ष से यथास्थिति का आदेश पारित है। अब और इस मामले में अंतरिम राहत दी जाने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि याची को YEIDA से बातचीत करने की अनुमति दी थी, जिससे कि मामले का सहमति से निस्तारण हो सके। मामला सहमति से निपट नहीं सका, लिहाजा इसमें अंतरिम आदेश बनाए रखना या पारित करना या हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।