इसी दौरान 21 दिसबंर 2018 को खंड शिक्षा अधिकारी अरनिया ने नोटिस दिया कि उन्होंने मृतक आश्रित के रूप में प्रथम नियुक्ति को छिपाते हुए सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति ली। जांच पड़ताल के बाद बीएसए ने याची की नियुक्ति को निरस्त कर दिया।
फिर याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने कहा, चौकीदार के पद से कब त्याग पत्र दिया और किस प्रक्रिया के अंतर्गत परिषदीय अध्यापकों की नियुक्ति/पदोन्नति समिति ने उन्हें सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति दी, इसका कोई साक्ष्य नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि सहायक अध्यापक पद की योग्यता बीटीसी है, जो याचिकाकर्ता के पास नहीं है। ऐसे में वह सहायक अध्यापक पद के लिए योग्य नहीं था. लेकिन वेतन की वसूली न करने का आदेश दिया।