उधर हिंसक प्रदर्शनों के बाद प्रयागराज व कानपुर में हुई कार्रवाई पर सवाल उठाने वाली दो याचिकाओं पर भी सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि कार्रवाई कानून के अनुसार की गई। लेकिन जावेद के परिजनों ने सरकार के दावों को गलत बताया है। उनके परिजनों ने कहा कि जिला प्रशासन नक्शा न पास होने की बात करता है तो यह बताया जाए कि शहर में कितने मकानों का नक्शा पास है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 90 प्रतिशत मकान ऐसे हैं जिनका निर्माण बिना नक्शा पास कराए किया गया है। परिजनों का यह भी कहना है कि उन्हें पूर्व में कोई नोटिस नहीं मिला। 10 जून को पहले जावेद और फिर उनकी पत्नी व बेटी को अवैध तरीके से हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद रात 11 बजे के करीब एक नोटिस घर पर चिपका दी गई। फिर अगले ही दिन मकान गिरा दिया गया।
उनका यह भी कहना है कि जो नोटिस मकान पर चिपकाया गया, वह जावेद मोहम्मद के नाम पर था। जबकि जमीन की रजिस्ट्री उनकी पत्नी परवीन फातिमा के नाम पर है। घरवालों का कहना है कि यह कार्रवाई नियमविरुद्ध तो है ही, यह असंवैधानिक भी है। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इंसाफ के लिए वह अंतिम दम तक लड़ाई लडेंगे।