इस बार गर्मी के दिनों में संगमनगरी के निवासियों को पानी के संकट का सामना करना पड़ सकता है। शहरी क्षेत्र के भूगर्भ जल का स्तर हर साल 23 सेमी तक नीचे जा रहा है। भूजल विभाग की तरफ से लोक सेवा आयोग पर लगाए गए डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर की मानसून से पहले की रिपोर्ट के आधार पर भूजल स्तर माइनस 1.93 मीटर दर्ज किया गया है, जो कि डेढ़ मीटर से अधिक है। अगर जल दोहन पर अंकुश नहीं लगा तो आने वाले दिनों में घरों में जलापूर्ति पर असर पड़ सकता है।
अनियंत्रित शहरीकरण, सबमर्सिबल पंपों के माध्यम से अत्यधिक जल दोहन, कंक्रीटाइजेशन से पानी भूमि के अंदर तक न पहुंचने और वर्षा जल संचयन के अभाव से हर साल भूगर्भ जल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। शहर के अपार्टमेंट में वर्षा जल संचयन के उचित प्रबंध नहीं हैं। इसके अलावा शहर में दो दर्जन से अधिक आरओ प्लांट अवैध रूप से संचालित हैं, जिसकी वजह से जल दोहन में निरंतर वृद्ध हो रही है।
मानसून से पहले और मानसून के बाद भूजल विभाग की तरफ से जल स्तर को परखा जाता है। मानसून के दौरान बाढ़ आने से भूजल स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जाती थी, लेकिन अब हर साल करीब 23 सेमी की गिरावट देखने को मिल रही है। शहरी क्षेत्र के अलावा यमुनापार के कई इलाकों का भूजल स्तर भी नीचे गिरा है। धनूपुर में भूजल स्तर माइनस 11.18 व करछना में माइनस 0.24 दर्ज किया गया है। भूजल विभाग की रिपोर्ट में गंगापार के चाका और सहसों का जल स्तर भी नीचे पाया गया है।
जल दोहन का असर भूजल स्तर पर देखने को मिल रहा है। हर साल भूजल स्तर करीब 23 सेमी नीचे गिर रहा है। ऐसे में जल दोहन पर अंकुश लगाने के साथ वर्षा जल संचयन प्रणाली को मजबूत करना आवश्यक है।
- अविरल सिंह, जल वैज्ञानिक