भारतीय रेलवे ने अपने लाखों कर्मचारियों और उनके परिजनों को चिकित्सा सुविधा के मामले में बड़ी राहत दी है। अब गंभीर बीमारी के इलाज के लिए दूसरे जोन या शहर के रेलवे अस्पताल जाने वाले कर्मचारियों को वापसी के पास के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे।
भारतीय रेलवे ने अपने लाखों कर्मचारियों और उनके परिजनों को चिकित्सा सुविधा के मामले में बड़ी राहत दी है। अब गंभीर बीमारी के इलाज के लिए दूसरे जोन या शहर के रेलवे अस्पताल जाने वाले कर्मचारियों को वापसी के पास के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने मेडिकल स्पेशल पास के नियमों में बदलाव किया है। अभी तक नियम था कि यदि किसी रेलकर्मी या उसके आश्रित का इलाज लंबा खिंच जाए और पास की वैधता खत्म हो जाए तो वापसी का पास बनवाना कठिन होता था। स्थानीय रेलवे कार्यालयों से अनुमति मिलने में होने वाली देरी से मरीज और तीमारदार परेशान होते थे।
विज्ञापन
बोर्ड के नए निर्देशों के अनुसार अब मेडिकल पास जारी करते समय ही अधिकारी उस पर ‘एंडोर्समेंट’ (अनुमोदन की मुहर) लगा देंगे। इस मुहर के आधार पर संबंधित अस्पताल वाले क्षेत्र का रेलवे कार्यालय तुरंत वापसी का पास जारी करने के लिए बाध्य होगा। इस संबंध में रेलवे बोर्ड की डिप्टी डायरेक्टर (वेलफेयर) रश्मि दहिया ने उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोनल रेलवे को पत्र जारी किया है। 20 मार्च को पत्र जारी होने के साथ इसे प्रयागराज, आगरा, झांसी, वाराणसी, लखनऊ, मुरादाबाद, इज्जतनगर (बरेली), अंबाला, फिरोजपुर, जम्मू, दिल्ली समेत सभी जोनल रेलवे के मंडल में इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
‘बोर्ड के निर्देश प्राप्त हो चुके हैं और इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसका उद्देश्य इलाज के दौरान कर्मचारियों को प्रशासनिक तनाव से मुक्त रखना है।’ - शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे