कॉफी हाउस में चुनावी चर्चा में मशगूल बाबा अभय अवस्थी कहते हैं कि यह धरा सियासी सोने की खान रही है। यहां से नेहरू, शास्त्री के अलावा बिश्वंभर नाथ पांडेय सरीखे राजनीतिक शूरमा निकल चुके हैं। इस बार नगर निगम से फिर राजनीति की दिशा तय होनी चाहिए। फिलहाल इस निकाय चुनाव में कांग्रेसी हर अड़ी, चौराहे पर नेहरू को याद कर रहे हैं। पूर्व सभासद शिव सेवक सिंह कहते हैं कि इस बार की चुनाव काफी दिलचस्प होने जा रहा है।
ब्रिटिश हुकूमत में पहली बार 1863 में गठित हुई थी म्युनिसिपल कमेटी
ब्रिटिश हुकूमत में पहली बार 1863 में म्युनिसिपल कमेटी गठित की गई थी। उस समय कमेटी में 50 सदस्यों को नामित किया गया था। जिनमें छह छह पदेन सदस्य और बाकी 19 को हर साल चुना जाता था।
इसके बाद 1867 में इलाहाबाद समेत 13 म्युनिसिपल कमेटियों का गठन हुआ। जिसमें दो वर्षों के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नामित किए जाते थे। तब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अधिकतर अंग्रेजी हुकूमत के अधिकारी ही बनाए जाते थे। 1883 में नार्थ वेस्टर्न प्रोविसेज एंड अवध म्युनिसिपिलिटी को सीमित अधिकार दिए गए। 1916 में इलाहाबाद म्पुनिसिपल बोर्ड का गठन हुआ, जिसके अध्यक्ष शिवचरण लाल बने। 1921 में पुरुषोत्तम दास चेयरमैन चुने गए थे।