निर्वाचन आयोग के प्रेक्षकोें ने फूलपुर एवं इलाहाबाद संसदीय सीट के प्रत्याशियों तथा उनके प्रतिनिधियों के साथ शनिवार को पहली बैठक में आचार संहिता का पाठ पढ़ाया। साथ ही चुनावी प्रक्रिया से अवगत कराया। बैठक में मतदाता सूची में गड़बड़ी तथा आचार संहिता के उल्लंघन का मुद्दा भी उठा। विपक्षी पार्टियों के प्रतिनिधियों ने सत्ता दल के प्रत्याशियों को प्रश्रय देने का आरोप लगाया।
सपा के केके श्रीवास्तव का कहना था कि 31 जनवरी को मतदाता सूची जारी होने के बाद शहर पश्चिमी में 13 हजार तथा उत्तरी में नौ हजार मतदाता बढ़ गए। जबकि, भाग दो में प्रत्याशियों, एजेंटों तथा गणमान्य लोगाें के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाते रहे हैं। इस पर बताया गया कि सैन्य क्षेत्र में ज्यादा मतदाता बनाए गए हैं, लेकिन इसके बाद यह मुद्दा उठा कि यहां नाम जुड़ने के बाद संबंधित जिले की मतदाता सूची से ऐसे लोगों का नाम हटना चाहिए। इस पर डीएम ने आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया।
प्रत्याशियों ने कटरा, कीडगंज आदि मोहल्लों में दलों का झंडा लगे होने की शिकायत की। भाकपा के गिरधर गोपाल ने सभाओं और रैलियों की अनुमति लेने की प्रक्रिया की जटिलता पर सवाल उठाया। हालांकि, अफसरों ने निर्वाचन आयोग के निर्देशों का हवाला देते हुए इसमें किसी तरह के संशोधन में असमर्थता जताई। बैठक में प्रेक्षकों ने प्रत्याशियों के बैंक खाता, खर्च, व्यय का विवरण देने के प्रारूप आदि पर विस्तार से चर्चा की। डीएम और सीडीओ ने चुनाव के बारे में बताया तो एसएसपी ने सुरक्षा संबंधी जानकारी दी।