पंचायत राज एक्ट की धारा 27के अंतर्गत जिलाधिकारी ने चीफ आडिट अधिकारी से जांच न कराने पर वसूली आदेश जारी किया था। जबकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दिनेश कुमार केस में इस मुद्दे को तय कर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुद्दा अदालत के फैसले से तय होने के बावजूद अधिकारियों की मनमानी से व्यर्थ की याचिकाएं आने पर नाराजगी जाहिर की है।और कहा कि सरकारी मशीनरी तय मुद्दे पर ध्यान न देकर कोर्ट पर व्यर्थ के मुकद्दमों का बोझ डाल रही है। इसमें न केवल लोगों की शक्ति व धन खर्च हो रहा अपितु सरकारी खजाना बिना किसी उद्देश्य के खर्च किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा अधिकारियों काउंसिलिंग कराने की जरूरत है।
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इसलिए कोर्ट ने सचिव पंचायत राज लखनऊ को अधिकारियों के लिए इस आशय का सर्कुलर जारी कर हाईकोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया है।और 13सितंबर 23के जिलाधिकारी आजमगढ़ के वसूली आदेश को रद कर दिया है तथा मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने नगीना सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
पंचायत राज एक्ट की धारा 27के अंतर्गत जिलाधिकारी ने चीफ आडिट अधिकारी से जांच न कराने पर वसूली आदेश जारी किया था। जबकि, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दिनेश कुमार केस में इस मुद्दे को तय कर दिया है। आडिट न होने पर वसूली कार्यवाही नहीं की जायेगी। इसके बावजूद जिलाधिकारी ने वसूली कार्यवाही की और याची को हाईकोर्ट आना पड़ा।