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यूनाइटेड मेडिसिटी अस्पताल में खुशी की मौत मामले में जांच पूरी, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय

Wed, 10 Mar 2021 12:18 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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भारतीय किसान यूनियन ने रावतपुर स्थित युनाइटेड मेडिसिटी अस्पताल के बाहर बच्ची की मौत के जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। - फोटो : prayagraj
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यूनाइटेड मेडिसिटी अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से खुशी की मौत के आरोप के मामले में डीएम की ओर से गठित समिति ने मंगलवार को जांच पूरी कर ली। बुधवार को रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी।
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 दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। इसके बाद रिपोर्ट राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेजी जाएगी। उधर अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि बच्ची का इलाज योग्य चिकित्सकों द्वारा किया गया था। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। 

आंत में इंफेक्शन के बाद तीन साल की बच्ची को यूनाइटेड मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया  गया था। दो बार ऑपरेशन के बाद आगे के इलाज के लिए बच्ची को चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया लेकिन परिजन वहां से बच्ची को लेते गए। परिजनों का आरोप है कि वे बच्ची को दोबारा यूनाइटेड अस्पताल ले गए, लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया। इस दौरान उसकी मौत हो गई। पूरे मामले का राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी संज्ञान में लेते हुए रिपोर्ट तलब की है।
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आयोग ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय करते हुए रिपोर्ट मांगी है। इसी सिलसिले में एडीएम सिटी और सीएमओ की जांच कमेटी ने मंगलवार को जांच पूरी कर ली। घटनाक्रम की सत्यता के साथ इसकी भी जांच की गई है कि अस्पताल के डॉक्टर को बच्चों के ऑपरेशन का अधिकार है या नहीं। एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया का कहना है कि जांच पूरी हो चुकी है।

सीएमओ के माध्यम से बुधवार को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी तय कर ली जाएगी। इसके बाद डीएम तथा आयोग को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सपा नेता ऋचा सिंह, मंजू पाठक, गुड्डी यादव, प्रमोद बच्चा, पिंटू यादव आदि ने बच्ची के परिजनों से मुलाकात की। ऋचा का कहना है कि परिजनों में जांच की प्रगति को लेकर नाराजगी है।

इस बीच यूनाइटेड मेडिसिटी अस्पताल ने कहा है कि लोगों के बीच यह बात फैलाई जा रही है कि अस्पताल ने बच्ची के इलाज के लिए दो लाख रुपये ले लिए,  जोकि पूरी तरह से असत्य है। अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि मरीज से केवल 6,370 रुपये ही लिए गए। इसके अलावा यह आरोप भी गलत है कि बच्ची का पेट खुला छोड़ दिया गया था।

बच्ची को तीन मार्च को मेडिकल केयर के साथ उच्च इलाज के लिए रेफर किया गया था। तीन से पांच मार्च के बीच बच्ची का इलाज कैसे हुआ, इसकी उसे जानकारी नहीं है।  भारतीय किसान यूनियन ने रावतपुर स्थित युनाइटेड मेडिसिटी अस्पताल के बाहर बच्ची की मौत के जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
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