सूचना न देख पाने के कारण हाथ से फिसल गई नौकरी
चार दिन इंटरनेट ठप होने से कई संस्थानों को झटका
प्रयागराज। शहर में चार दिन की नेटबंदी ने एक युवा का कॅरियर चौपट कर दिया और नौकरी उसके हाथ से फिसल गई। अब छात्र जिला प्रशासन के दफ्तरों का दरवाजा खटखटा रहा है ताकि उसे वह आदेश मिल सके, जिसके तहत शहर में इंटरनेट बंद किया गया। उसे आदेश की कोई प्रति नहीं मिल सकी। यह तो एक उदाहरण मात्र है। नेटबंदी ने कई संस्थानों को भी तगड़ा झटका दिया और संस्थानों को अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम में परिवर्तन करना पड़ा।
सूर्य प्रकाश दुबे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के शोधार्थी हैं। सूर्य प्रकाश हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित असिस्टेंट प्रोेफेसर भर्ती परीक्षा में शामिल हुए थे। लिखित परीक्षा इसी वर्ष तीन एवं चार अक्तूबर को हुई थी। इतिहास विषय के कुल 22 पद हैं। सूर्य प्रकाश ने लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। अब इंटरव्यू होना है, लेकिन इससे पहले अभ्यर्थियों को अपने आवेदन में किए दावों को पुष्ट करने के लिए जरूरी अभिलेखों की हार्डकॉपी हरियाणा लोक सेवा आयोग में जमा करनी है।
इसी की सूचना ऑनलाइन जारी की गई थी। अंतिम तिथि 23 दिसंबर निर्धारित की गई थी, लेकिन शहर में 19 दिसंबर से इंटरनेट सेवा पूरी तरह से बाधित हो गई। चार दिन नेटबंदी के कारण सूर्य प्रकाश इंटरनेट पर सूचना नहीं देख सके। 24 दिसंबर को हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से आदेश जारी कर सूर्य प्रकाश का अभ्यर्थन निरस्त कर दिया गया। सूर्य प्रकाश पर जिला प्रशासन के दफ्तरों की खाक छान रहे हैं, लेकिन उन्हें नेटबंदी के आदेश की कोई प्रति नहीं मिल सकी। अगर उन्हें आदेश की प्रति मिल जाती तो वह हरियाणा लोक सेवा आयोग के समक्ष अपनी बात रख सकते। सूर्य प्रकाश का कहना है कि इंटरनेट सेवा बंद होने के कारण उनका कॅरियर चौपट हो गया।
वहीं, तमाम संस्थानों को भी नेटबंदी ने झटका दिया। उच्च शिक्षा निदेशालय को असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग की नई तारीख जारी करनी पड़ी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2019 की उत्तरकुंजी पर आपत्ति लेने की तिथि बढ़ानी पड़ी। वहीं, प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय को शिक्षक भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि और परीक्षार्थियों के परीक्षा फॉर्म ऑनलाइन करने की अंतिम तिथि बढ़ानी पड़ी। इससे अभ्यर्थियों, परीक्षार्थियों के साथ संस्थानों को भी दिक्कत झेलनी पड़ी।