इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण के मामले में पुलिस की प्रथम दृष्टया लापरवाही और अभियोजन की कहानी पर संदेह जताते हुए आरोपी बृजेश उर्फ ब्रजपाल को अंतरिम जमानत दे दी है। वहीं, बिजनौर के एसपी को सुनवाई की अगली तारीख 19 नवंबर को ऊषा देवी की बरामदगी की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने बृजेश उर्फ ब्रजपाल की जमानत अर्जी पर दिया है।
अपहरण के आरोपी ब्रजपाल ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। इस दौरान कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता की अपह्रत पत्नी की बरामदगी किए बिना पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। इस पर कोर्ट ने एसपी, जांच अधिकारी और शिकायतकर्ता गजराम को तलब किया था। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में एसपी बिजनौर ने अदालत हाजिर होकर बताया कि अपहृत महिला ऊषा देवी को बरामद करने के लिए एक टीम गठित की गई है और पुलिस सभी संभव प्रयास कर रही है।
एसपी ने यह भी उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता (गजराम सिंह) पर भी संदेह है। क्योंकि, एफआईआर के किसी भी गवाह ने उसके मामले का समर्थन नहीं किया। ऐसे में अंतिम रिपोर्ट दायर की गई थी। कोर्ट ने कहा कि उक्त तथ्य न केवल अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा करते हैं, बल्कि पुलिस की ओर से प्रथम दृष्टया लापरवाही को भी दर्शाते हैं। आरोपी 20 जनवरी 2025 से जेल में है और शिकायतकर्ता के आरोप के अलावा उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। अदालत ने अपहृत महिला ऊषा देवी की बरामदगी तक आरोपी को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।