फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी : प्रदेश में मुकदमों के गवाहों की सुरक्षा योजना लागू करने का निर्देश

Mon, 07 Jun 2021 09:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • साक्षी सुरक्षा योजना 2018 को लागू करने में की जा रही कोताही
  • आत्महत्या के दुष्प्रेरण के आरोपी सभासद शाही की सशर्त जमानत मंजूर
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुकदमों के गवाहों की सुरक्षा के लिए बनाई गई साक्षी सुरक्षा योजना 2018 को लागू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को इस आशय के आदेश दिए है। इस योजना के तहत शिकायतकर्ता व आपराधिक केस के गवाहों को अपनी सुरक्षा की मांग राज्य सरकार या पुलिस अधीक्षक से करने का अधिकार दिया गया है और राज्य पर ऐसी अर्जी पर सुरक्षा उपलब्ध कराने का दायित्व सौंपा गया है।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने महेंद्र चावला केस में योजना को विधि का दर्जा देते हुए राज्यों को इसे लागू करने व कानून बनाने का निर्देश दिया है। जिसका पालन न होने पर कोर्ट ने मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक से चार हफ्ते में प्रगति रिपोर्ट के साथ हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई पांच जुलाई को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने रवींद्र प्रताप शाही उर्फ पप्पू शाही की जमानत अर्जी पर दिया है। कोर्ट ने आत्महत्या के दुष्प्रेरण के आरोपी शाही की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है।

15 मार्च 21 को संतकबीर नगर के महुली थाना क्षेत्र में रेलवे गेट मैन रघुवीर ने जिंदगी से आजिज आकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट और ऑडियो में याची द्वारा परेशान करने व धमकाने से ऊबकर आत्महत्या करने की बात कही गई है।
विज्ञापन


मामला यह है कि राम वचन के नाम नगर पंचायत हरिहरपुर ने जगदीशपुर गौरा में जमीन का पट्टा दिया। जिसे याची सभासद व पूर्व अध्यक्ष नगर पंचायत रवीन्द्र प्रताप शाही ने अध्यक्ष जितेन्द्र कनौजिया के साथ मिलकर निरस्त करा दिया। इसी घटना को लेकर शिकायतकर्ता के बेटे ने परेशान किए जाने पर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है।

कोर्ट ने कहा जमानत नियम है और जेल अपवाद। पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती तो घटना टाली जा सकती थी। ऐसा साक्षी सुरक्षा योजना पर अमल न करने से हुआ। सुप्रीम कोर्ट का आदेश बाध्यकारी है। जिसपर अमल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मुख्य सचिव को कानून बनाकर योजना को लागू करने और प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें