बेटे आशुतोष ने बताया कि उनके पिता विभागीय कार्य से अक्सर हाईकोर्ट आया करते थे लेकिन वह झूंसी पर कभी नहीं उतरते थे। हमेशा प्रयागराज जंक्शन पर उतरते थे। आशंका जताई जा रही है कि झूंसी स्टेशन पर ट्रेन धीमी होने पर वह यहीं उतरकर घर जाने के लिए सोचे होंगे। तभी पैर फिसलने से घटना के शिकार हो गए।
झूंसी स्टेशन पर शुक्रवार देर रात ट्रेन की चपेट में आने से भदोही में तैनात दरोगा की मौत हो गई। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में विभागीय काम से आ रहे थे। अजय कुमार त्रिपाठी (55) मूलरूप से गाजीपुर जिले के सादात थाने के रिस्ती गांव के रहने वाले थे। उनका परिवार झूंसी के त्रिवेणीपुरम में रहता था। उनकी तैनाती भदोही जिले के रीट सेल में थी। परिवार में पत्नी गरिमा के अलावा दो बेटे और एक बेटी है। बेटे आशुतोष ने बताया कि उनके पिता को विभागीय कार्य की वजह से इलाहाबाद हाईकोर्ट आना था।
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उन्होंने शुक्रवार की शाम भदोही से ट्रेन पकड़ी थी। रात 9:30 बजे बहन के फोन करने पर एक व्यक्ति ने फोन उठाया और बताया कि ट्रेन की चपेट में आकर वह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सब लोग झूंसी पहुंचे। घायल दरोगा को लेकर एसआरएन अस्पताल पहुंचे, जहां डाॅक्टरों ने चेकअप के बाद मृत घोषित कर दिया।
हमेशा प्रयागराज स्टेशन पर उतरते थे
बेटे आशुतोष ने बताया कि उनके पिता विभागीय कार्य से अक्सर हाईकोर्ट आया करते थे लेकिन वह झूंसी पर कभी नहीं उतरते थे। हमेशा प्रयागराज जंक्शन पर उतरते थे। आशंका जताई जा रही है कि झूंसी स्टेशन पर ट्रेन धीमी होने पर वह यहीं उतरकर घर जाने के लिए सोचे होंगे। तभी पैर फिसलने से घटना के शिकार हो गए।