शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-दो पर प्रस्तावित इनर रिंग रोड परियोजना प्रथम चरण में जिले के 45 गांवों से होकर गुजरेगी। भूमि अधिग्रहण से पहले इस परियोजना की जद में आने वाले किसानों की आपत्तियों का निस्तारण आरंभ हो गया है। आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद चालू महीने के अंत तक नेशनल हाईवे की धारा 3-डी के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
इनर रिंग रोड परियोजना में प्रभावित होने वाले किसानों के भूमि, भवनों के स्वामित्व विवाद के अलावा मुआवजा संबंधी आपत्तियों का निस्तारण इसी हफ्ते कर लिया जाएगा। नए भू-अध्याप्ति अधिकारी योगेंद्र सिंह इनररिंग रोड को लेकर आई आपत्तियों की सुनवाई कर रहे हैं। इस परियोजना में भूमि अधिग्रहण को लेकर कुल 59 आपत्तियां आई हैं। अफसरों की मानें तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इनररिंग रोड परियोजना का काम जल्द शुरू कराना चाहते हैं।
कुंभ को ध्यान में रखकर होगा निर्माण
इसके लिए एनएचएआई के अफसरों से लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। एनएचएआई के अफसर भी चाहते हैं कि जल्द भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराकर निर्माण शुरू करा दिया जाए। इसके लिए सिर्फ आपत्तियों के निस्तारण का इंतजार है। आपत्तियों का निस्तारण होने के साथ ही चालू महीने के अंत तक 3-डी के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराने की तैयारी है।
कानपुर से वाराणसी को जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-दो पर इनर रिंग रोड के प्रथम चरण का निर्माण आगामी कुंभ मेले को ध्यान में रखकर कराने की योजना है। रीवा रोड से जीटी रोड पर महुआरी, लवाइन कला होते हुए अंदावा के रास्ते इस रिंग रोड को आगे ले जाकर सहसों में फिर एनएच-2 से मिला दिया जाएगा। रिंग रोड के बन जाने से कानपुर से मध्य प्रदेश जाने वाले वाहनों को शहर में इंट्री नहीं करनी होगी। वहीं, एमपी से कानपुर या वाराणसी जाने वालों को भी इससे काफी राहत मिलेगी।
बिना शहर में प्रवेश किए निकाले जाएंगे रास्ते
बिना शहर में प्रवेश किए रिंग रोड के रास्ते निकल जाएंगे। इससे शहरियों को ट्रैफिक की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा कई जगह एप्रोच मार्ग बनने से जिले के ग्रामीणांचल इलाकों के लोगों को भी काफी राहत मिलेगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को इस परियोजना के लिए 402 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत करनी है।
इसी महीने धारा 3-डी के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद किसानों की अधिग्रहीत जमीनों का मूल्यांकन किया जाएगा। डीपीआर बनाने वाली कंपनी ही मूल्यांकन करेगी। इसके बाद मुआवजे का भुगतान आरंभ कर दिया जाएगा। एके राय, परियोजना निदेशक-एनएचएआई।