फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट दाल, सब्जी थाली से हो रहीं गायब

Wed, 28 Oct 2020 06:19 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
विज्ञापन
सब्जी मंडी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
कोराना काल के दौरान त्योहारी सीजन में आम आदमी को महंगाई ने तगड़ा झटका दिया है। राशन, सब्जियों से लेकर तेल एवं दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुओं के दाम में आई तेजी ने गृहणियों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। लगातार दाम बढ़ने से लोगों की थाली से दाल गायब होने की कगार पर पहुंच गई है। यही नहीं दाल में तड़का लगाना भी महंगा पड़ रहा है। सरसों के तेल से लेकर रिफाइंड तक के दाम में तेजी आई है। आलू, प्याज के भाव पहले से ही बढ़े हुए हैं।
विज्ञापन


आलू का रेट पिछले तीन माह से बढ़ा हुआ है। अमूमन बारिश के मौसम में ही आलू का रेट बढ़ता है। बीते कुछ वर्ष के दौरान बारिश के दौरान आलू का अधिकतम रेट 25 रुपये किलो तक ही गया, लेकिन इस बार आलू 50 रुपये तक बिक रहा है। शहर की किसी भी मंडी में आलू 40 रुपये किलो से कम नहीं है। इस बीच प्याज के बढ़ रहे रेट ने भी लोगों को परेशान कर रखा है। मंगलवार को शहर के फुटकर बाजार में प्याज 70 से 80 रुपये किलो में ही लोगों को उपलब्ध हुआ। हालांकि मंडी में प्याज का रेट 30 से 45 रुपये किलो तक का है। अच्छी क्वालिटी के आलू का मंगलवार को मुंडेरा मंडी में थोक रेट 30 रुपये और सामान्य आलू का 8 से 25 रुपये प्रति किलो रहा।

जमाखोरी से दाल की कीमतों में आया उछाल
लॉक डाउन के दौरान 100 रुपये किलो में बिकने वाला सरसों का तेल इस समय 130 रुपये किलो बिक रहा है। इसी तरह फार्चून का रिफाइंड का दाम भी 105 रुपये से बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर हो गया है। उधर अरहर दाल की बात करें तो पखवाड़े भर के भीतर इसके दाम में 25 रुपये किलो तक की कमी तो आई है। वर्तमान में फुटकर में अरहर दाल का रेट 110 से 120 रुपये किलो है, जबकि लॉक डाउन के दौरान अरहर की दाल 80 से 90 रुपये किलो में उपलब्ध थी। 10 अक्तूबर के आसपास अरहर दाल का दाम 140 रुपये किलो पहुंच गया था।
विज्ञापन


इलाहाबाद गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश चंद्र केसरवानी ने कहना है कि दाल के दाम में आया उछाल जमाखोरों की वजह से हुआ। दूसरे प्रदेशों में खाद्य पदार्थों का भंडारण बड़े व्यापारी कर रहे हैं। नवीन मंडी मुंडेरा की सचिव रेनू वर्मा बताती हैं कि इस वक्त पूरा माल मंडी नहीं आ रहा है। आधा माल अन्य स्थानों पर उतर जाता है। हमें मंडी के बाहर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।

दाल एवं सब्जी बनाना हुआ मुश्किल
- सिविल लाइंस निवासी गृहणी सौम्या मालवीय बताती हैं कि लॉकडाउन में हरी सब्जियां व अन्य वस्तुएं सस्ती थीं। अब जब बाजार पूरी तरह से खुल चुके हैं तो खाद्य पदार्थों के दामों में बेतहाशा वृद्धि हो गई है। आजाद नगर की ज्योति शुक्ला कहती हैं कि अब एक समय दाल व एक समय सब्जी बनानी पड़ रही है। महंगाई पर नियंत्रण के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाना चाहिए। सब्जी विक्रेता राजेश कुमार ने बताया कि जब मंडी से सब्जी महंगी मिलती है, तो खुदरा व ठेला व्यापारी महंगा बेचने पर मजबूर होता है। प्राची जनरल स्टोर के संचालक पप्पू केसरवानी ने बताया कि चीनी, सूजी, आटा आदि के दाम सोमवार को थोक में बढ़ गए।
विज्ञापन


इस तरह बढ़ा अरहर की दाल का भाव
माह भाव
अप्रैल 75-80
मई 75-80
जून 80-85
जुलाई 85-95
अगस्त 90-100
सितंबर 100-110
अक्तूबर 130-140 (सात से दस अक्तूबर)
अक्तूबर 110-120 (27 अक्तूबर का रेट)
नोट... दाल का फुटकर रेट
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें