वर्तमान शिक्षा में जड़ता को दूर करना होगा। अवसरों की उपलब्धता सबके लिए सुनिश्चित करनी होगी। शिक्षा के विस्तार के साथ शिक्षण और प्रशिक्षण की नई विधियों का अनुशीलन करना होगा। साथ ही ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना होगा जो निर्णय लेने मे सक्षम हों। यह बात वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय सूरत के पूर्व कुलपति प्रेम कुमार शारदा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में कही।
मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्म दिवस के अवसर पर ‘राष्ट्रीय शिक्षा और समकालीन समाज’ विषय पर रविवार को आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि प्रो. प्रेम कुमार ने कहा कि हमें ऐसे विद्यार्थियों की जरूरत है जिनमें ज्ञान के अनुप्रयोग की क्षमता हो, जो टीम भावना से काम करते हों और जिनके अंदर सृजनात्मकता हो। अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने कहा कि शिक्षा में हम प्रेरणा का भाव नहीं ला पा रहे। आज की शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम बनती जा रही है। हमें शिक्षा को बदलाव का माध्यम भी बनाना होगा। रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने पाठ्यक्रम से बाहर निकलकर एक नए शैक्षिक वातावरण के निर्माण पर जोर दिया। संगोष्ठी के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर अली अहमद फातमी, धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के संयोजक प्रोफेसर शिव प्रसाद शुक्ल एवं संचालन डॉ. राजेश कुमार गर्ग ने किया। इस मौके पर चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे, डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार, वित्त अधिकारी डॉ. सुनील कांत मिश्र, डीन आर्ट्स प्रो. केएस मिश्र, डॉ. बृजेश कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।
मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्म दिवस पर इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय में ‘भारतीय शिक्षा: दशा एवं दिशा’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर अबुल कलाम आजाद के शिक्षा जगत में किए गए योगदान पर चर्चा की गई। इस दौरान मदरसा शिक्षा की अधुनिकता, मुफ्त और आवश्यक रूप से शिक्षा, शिक्षा के अधिकार जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। संयोजक प्रो. आरबीएस वर्मा ने मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्म, शिक्षा-दीक्षा, क्रांतिकारियों से संबंध, राजनीतिक भागीदारी आदि पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी में प्रो. डीपी सिंह, प्रो. जगदीश नारायण गुप्ता, प्रो. जेएन मिश्र, प्रो. जेएन पाल ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्म दिवसपर हमीदिया गर्ल्स डिग्री कॉलेज के उर्दू एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया गया। मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उर्दू की विभागाध्यक्ष प्रो. शबनम हमीद ने कहा कि अगर इकबाल और अबुल कलाम की साहित्यिक परिप्रेक्ष्य में तुलना की जाए तो वह सूर्य एवं चंद्र की तरह ही दिखाई देंगे। वह हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे। उनके एक-एक शब्द आने वाली पीढ़ी को अग्रसर होने, व्यक्तित्व को निखारने का संदेश देते हैं। डॉ. शमा रानी ने कहा कि मौलाना आजाद नवीन तकनीकी शिक्षा के बड़े समर्थक एवं स्तंभ थे। प्राचार्य डॉ. यूसुफा नफीस ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अबुल कलाम की कहानी चिड़िया चिड़े के हवाले से व्यक्ति की उड़ान के महत्व को रेखांकित कियाद्य। संचालन नासेहा उस्मानी और धन्यवाद ज्ञापन जरीना बेगम ने किया।