औद्योगिक पार्क में चहारदीवारी, सीसी रोड, नाली, कलवर्ट, बिजली, पेयजल व सीवेज का विकास करने की जिम्मेदारी निजी प्रवर्तक की ही होगी। इसक लिए करीब 90 फीसदी तक सरकार अनुदान देगी। पहले तीन साल तक निजी प्रवर्तक से एक फीसदी का साधारण ब्याज लिया जाएगा। जबकि, चौथे साल से ब्याज दर छह फीसदी सालाना होगी। उद्योग नीति में कहा गया है कि 10 एकड़ से अधिक जमीन का मालिकाना हक रखने वाले जिला उद्योग केंद्र में आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए विभाग की ओर से शर्त रखी गई है कि यह जमीन पुश्तैनी होने के साथ खसरा खतौनी में अपडेट होनी चाहिए।
निजी औद्योगिक पार्क विकसित करने के लिए आवेदन के बाद उद्योग विभाग के अधिकारी जमीन का परीक्षण करेंगे। जमीन की लोकेशन, आवागमन की कनेक्टिविटी आदि मापदंडों को परखा जाएगा। इसके बाद जमीन पर ले-आउट के अनुसार नियोजित तरीके से भूखंड काटे जाएंगे। इस संबंध में सरकारी मानकों के मुताबिक ही नक्शा पास किया जाएगा। औद्योगिक पार्क की भूमि खरीदने के लिए स्टांप ड्यूटी पर सौ फीसदी छूट का प्रावधान किया गया है।
एक औद्योगिक पार्क में सौ से अधिक उद्योगों को स्थापित करने का लक्ष्य है। जिले में चार औद्योगिक पार्कों के लिए प्रदेश सरकार से वार्ता की जा रही है। सहकारी समितियों को भी इन पार्कों में न्यूनतम लागत पर ऋण दिलाकर मनचाहा उद्योगों को स्थापित कराया जाएगा। ताकि लोग छोटे-छोटे समूहों में कुटीर और लघु उद्योग लगाकर आत्म निर्भर बन सके।- निशीथ वर्मा, चेयरमैन-सिटीजन इंफ्रा वेंचर्स प्रालि. प्रयागराज।