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Prayagraj News: औद्योगिक नगरी... कभी समृद्घि का शिखर अब उखड़ रहीं सांसें

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कभी औद्योगिक नगरी कहा जाने वाला नैनी क्षेत्र अब वीरान है। 1990 के दशक तक 170 छोटे-बड़े उद्योगों और रोजगार से गुलजार रहने वाला क्षेत्र अब आखिरी सांसें गिन रहा है। तमाम प्रयास के बाद भी नैनी औद्योगिक क्षेत्र की उखड़ रहीं सांसों को लौटाया नहीं जा पा रहा है। यहां अब सिर्फ दो से तीन इकाइयां ही संचालित हैं। सैकड़ों को रोजगार देने वाली फैक्टरियों में सन्नाटा पसरा है।
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नैनी में वर्ष 1960 के आसपास स्वदेशी कॉटन मिल की स्थापना हुई। अगले 10 वर्षों में यहां करीब 20 बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों ने लघु उद्योग लगाया। यहां के बने उत्पाद विदेशों तक जाते थे लेकिन 90 के दशक के बाद कारखाने बंद होने लगे। लोगों से रोजगार छीनने लगा।
उद्योग बंद होते गए, उम्मीदें टूटती गईं

वर्ष 1990 के बाद औद्योगिक क्षेत्र अपना रसूख खोने लगा। अपट्रान, कॉटन मिल, कताई मिल, रिलायंस फैक्टरी, लिप्टन चाय, नैनी ग्लास वर्क्स, इलाहाबाद ग्लास वर्क्स, त्रिवेणी शीट और त्रिवेणी इंजीनियरिंग समेत करीब 20 बड़े उद्योगों के साथ करीब 150 लघु इकाइयों के बंद होने से लोगों की उम्मीदें टूट गईं।
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वर्ष 2008 में स्वदेशी कॉटन मिल और 2009 में त्रिवेणी ग्लास फैक्टरी के बंद होने के बाद रोजगार के दरवाजे भी बंद हो गए। इसी दौरान वर्ष 1984 में शुरू हुई मऊआइमा कताई मिल भी अगस्त 2010 में बंद हो गई। लोगों का रोजगार छिना तो उन्हें दूसरे शहरों का रुख कर लिया।
1,138.78 एकड़ की हाईटेक सिटी से जगी थी उम्मीद

उजड़ते औद्योगिक क्षेत्र को सहारा देने के लिए वर्ष 2016 में 1138.78 एकड़ में सरस्वती हाईटेक सिटी विकसित की गई। उद्योगों के लौटने पर रोजगार की संभावनाएं तलाशी जाने लगीं। हाईटेक सिटी से पुराना औद्योगिक गौरव हासिल करने की नाकाम कोशिश की गई। करीब एक दशक बीतने को है लेकिन यहां पर दो-तीन इकाइयों ने ही रफ्तार पकड़ी है। हाईटेक सिटी का अधिकांश हिस्सा 10 वर्ष बाद भी वीरान है।
महंगे भूखंड व जलभराव बनी बाधा

ईस्टर्न चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विनय टंडन के अनुसार, नैनी औद्योगिक क्षेत्र को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के प्रयासों से पहचान मिली थी। अब पूरा इलाका बदहाल है।
लघु उद्योग भारती के महामंत्री विक्रम टंडन ने कहा, सरस्वती हाईटेक सिटी में भूखंडों की कीमत छोटे उद्यमियों की पहुंच से बाहर है। बारिश में जलभराव भी बड़ी बाधा है।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष संजय कुमार जैन का कहना है कि हाईटेक सिटी में भूखंड की दर करीब पांच हजार रुपये प्रति वर्गमीटर किए जाने और एक हजार वर्गगज तक के भूखंड आवंटन की प्रक्रिया को तेज किए जाने की जरूरत है। इससे छोटे उद्यमियों को उद्योग लगाने का अवसर मिलेगा।

पेप्सी ने जगाई आस

सरस्वती हाईटेक सिटी में वरुण बेवरेजेज की पेप्सी ने उम्मीदें जगाईं। करीब एक हजार करोड़ रुपये के निवेश वाली इस इकाई से दो हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की बात कही जा रही है। कंपनी की जीएम प्रेरणा ने कहा कि पार्किंग, सीवर और जलभराव जैसी समस्याओं को दूर करने की जरूरत है।


कोट:
उद्यमियों की समस्याओं के निस्तारण का प्रयास किया जा रहा है। उद्योग बंधु समिति की बैठकों में आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान कराया जाता है। जिले में फिर से औद्योगिक विकास की रफ्तार तेज हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
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- शरद टंडन, उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र
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