संघ लोक सेवा आयोग की ओर से बुधवार को घोषित आईएएस के रिजल्ट में शहर के स्टैनली रोड जजेज कॉलोनी के अनुरूद्घ चरण मिश्र के पुत्र प्रथित चरण मिश्र ने अपने दूसरे प्रयास में 27 वर्ष की आयु में सफलता हासिल कर संगम नगरी का मान बढ़ाया है। प्रथित चरण मिश्र ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने दूसरे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में 106 वीं रैंक हासिल की है।
इलाहाबाद से चयनित होने वाले मेधावियों में प्रथित चरण मिश्र सही मायने में इलाहाबाद विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने इलाहाबाद विवि से पढ़ाई की है। इससे पूर्व में चयनित होने वाले अधिकांश अभ्यर्थी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं। प्रथित ने बताया कि स्कूली शिक्षा ब्वायज हाई स्कूल से पूरी करने के बाद उसका चयन इंजीनियरिंग में हो गया परंतु प्रशासनिक सेवा में जाने के मोह में उसने इलाहाबाद विवि से बीए करना उचित समझा। सिविल सेवा को लक्ष्य बनाकर ही मैने अपनी पढ़ाई जारी रखी। इस लक्ष्य को पाने केलिए प्रथित को उसके बाबा दुर्गाचरण मिश्र (रिटायर्ड पीसीएस) ने प्रेरित किया। प्रथित ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय पिता अनुरूद्घ चरण मिश्र और मां रचना मिश्रा को दिया है।
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) से एमटेक की पढ़ाई करने वाले घूरपुर के सारंगापुर गांव के मयंक मिश्र ने सिविल सेवा परीक्षा में 379 रैंक के साथ क्षेत्र का मान बढ़ाया है। शिक्षिका माता और पशु पालन विभाग में उप संचालक के पद पर कार्यरत डॉ. राकेश मिश्र के पुत्र मयंक ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा में भाग्य आजमाने की सोची। मयंक का छोटा भाई प्रतीक मिश्र कानपुर आईआईटी से एमटेक करने के बाद नौकरी कर रहा है। सिविल सेवा में चयन की जानकारी मिलने के बाद गांव में मयंक के घर बधाई देने वालों का तांता लगा है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ अपने चाचा शरद मिश्रा को दिया है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 2005 में बीए की पढ़ाई पूरी करने वाले आदित्य कुमार झा ने सिविल सेवा परीक्षा में 503 वीं रैंक हासिल कर विवि का मान बढ़ाया है। आदित्य कुमार वर्तमान में अपर जिला बचत अधिकारी एटा के पद पर तैनात हैं। मूल रूप से बिहार मधुबनी के रहने वाले आदित्य ने हाईस्कूल में 73 फीसदी और इंटरमीडिएट में 73 फीसदी में राजकीय इंटर कॉलेज से पूरी की। आदित्य के पिता प्रो. सदानंद झा राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से जुड़े हैं।