इलाहाबाद। निजी इंजीनियरिंग कालेजों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। उनको सत्र 2016-17 में अधिक फीस नहीं देनी पड़ेगी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पिछले सत्र में लागू फीस ही इस सत्र में वसूल करने का आदेश दिया है, साथ प्रदेश सरकार को आगामी तीन सत्रों के लिए छह माह में शुल्क का निर्धारण करने का निर्देश दिया है।
प्रदेश सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने एकलपीठ के आदेश को निष्प्रभावी घोषित करते हुए कहा है कि 22 जून 2016 को जारी शासनादेश के तहत ही फीस वसूली जाएगी। प्रदेश सरकार के विशेष अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी के मुताबिक इंजीनियरिंग कालेजों में शुल्क तय करने की जिम्मेदारी प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा की अध्यक्षता वाली समिति की है। इस सत्र (2016-17) का शुल्क तय करने के लिए प्रमुख सचिव मोनिका गर्ग ने एक उपसमिति का गठन किया। उपसमिति ने कालेजों से प्रस्ताव मांगे मगर करीब 600 कालेजों में से मात्र पांच कालेजों ने ही प्रस्ताव भेजे। इस पर समिति ने रिपोर्ट दी कि इस सत्र में शुल्क का निर्धारण करने में विलंब हो गया है, लिहाजा संस्थान पिछले सत्र 2015-16 में लागू फीस ही वसूल करेंगे।
शासन ने इस संबंध में 22 जून 2016 को शासनादेश जारी कर दिया। गाजियाबाद के अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कालेज ने शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। एकल न्यायपीठ ने 22 जून के शासनादेश को रद्द करते हुए निजी कालेजों को शुल्क संबंधी प्रस्ताव 29 अगस्त तक सरकार को देने के लिए कहा। साथ ही प्रदेश सरकार को 26 नवंबर तक इस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। एकल न्यायपीठ ने छात्रों से भी कहा कि यदि शुल्क निर्धारण के बाद फीस बढ़ती है तो वह उसे देने के लिए बाध्य होंगे।
प्रदेश सरकार की अपील स्वीकार करते हुए खंडपीठ ने छह माह के भीतर सत्र 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के लिए शुल्क का निर्धारण करने के लिए कहा है। मौजूदा सत्र मेें छात्रों को 22 जून के शासनादेश के तहत पिछले सत्र में लागू शुल्क ही देना होगा।