इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार व आयकर विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है कि आयकर अपीलीय अधिकरण प्रयागराज में स्थायी सदस्य की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही है और सदस्य की नियुक्ति न कर अधिकरण के कार्य में क्यों अवरोध उत्पन्न किया जा रहा है। कोर्ट ने केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को अगली सुनवाई की तिथि नौ सितंबर 20 तक कारण बताते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति अजय भनोट की खंडपीठ ने इलाहाबाद विकास प्राधिकरण की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है। प्राधिकरण के खिलाफ आयकर विभाग ने वर्ष 2014-15 से वर्ष 2016-17 तीन वर्ष के बकाये क्रमश: 8.2 करोड़ रुपये 10. 85 करोड़ रुपये एवं 18.11 करोड़ रुपये का वसूली नोटिस जारी किया है, जिसके खिलाफ विभागीय अपील खारिज कर दी गई तो अपीलीय अधिकरण में अपील दाखिल की गई है। किंतु सदस्य न होने के कारण सुनवाई नहीं हो पा रही है, जिसपर यह याचिका दाखिल की गई है।
प्राधिकरण का कहना है कि स्थायी सदस्य की नियुक्ति न किए जाने से अपीलीय अधिकरण कार्य नहीं कर रहा है। दूसरी तरफ आयकर विभाग वसूली का दबाव बना रहा है। बिना अपील की सुनवाई के जबरन भारी धनराशि की वसूली होने से प्राधिकरण के विकास कार्य प्रभावित होंगे। याचिका में आयकर अपीलीय अधिकरण प्रयागराज में स्थायी सदस्य की नियुक्ति का केंद्र सरकार को निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
कोर्ट ने विभाग से जानकारी मांगी तो विभाग के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोयल व गौरव महाजन ने बताया कि अधिकरण में समय आने पर पीठ बैठती है। पिछले एक साल मे 11दिन प्रयागराज में पीठ ने बैठकर मुकदमा सुना है। याची अधिवक्ता आशीष बंसल ने कहा कि प्रयागराज अधिकरण का पूर्वी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों का क्षेत्राधिकार है।
स्थायी सदस्य की नियुक्ति न किए जाने से अपीलीय अधिकरण कार्य नहीं कर रहा है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की और कहा है कि यह सरकार की विफलता है। अधिकरण का कार्य न करना न्याय देने से इंकार करना है और टैक्सदाता का उत्पीड़न करना है। केंद्र सरकार की तरफ से अपर सालीसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह ने पक्ष रखा। कोर्ट ने अधिकरण के सदस्य की नियुक्ति न करने का कारण हलफनामे के मार्फत बताने का निर्देश दिया है। सुनवाई 9 सितंबर को होगी।