उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही नए सियासी समीकरण बनते जा रहे हैं। बीएसपी से बागी हुए नेताओं ने अपनी हनक बनाए रखने के लिए न तो यूपी की सत्ताधारी पार्टी सपा का सहारा लिया है और न ही केंद्र में बैठी बीजेपी का दामन थामा है। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से साथ तालमेल बिठाया है। इससे दोनों को ही फायदा नजर आ रहा है। एक ओर जहां नीतीश यूपी में पैठ बनाने को बेताब हैं, वहीं बागी नेताओं को भी एक बड़ा चेहरा मिल जाएगा। ऐसे में प्रदेश कीराजनीति में भी सियासत की नई संभावनाएं बन रही हैं।
तमाम कयासों के बीच बीएसपी के बागी हुए नेता एवं पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने नीतीश कुमार के साथ हाथ मिलाया है। 26 जुलाई को नीतीश लखनऊ में बीएस-4 की होने वाली रैली में के मुख्य अतिथि होंगे। हालांकि आरके चौधरी पार्टियों के विलय जैसी किसी संभावना से इनकार करते हुए दोनों के अस्तित्व की बात कहते हैं लेकिन दोनों के बीच सियासी गठबंधन के संकेत साफ हैं। संगठन खड़ा करने के अनुभव के साथ आरके चौधरी का दलितों में प्रभाव है।
वह बीएसपी से अलग होने के बाद बीएस-4 को खड़ा कर दलितों के बीच अपनी पहचान को ज्यादा मजबूत करने में जुटे हैं। वह बागी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के संपर्क में भी हैं। अगर दोनों नेताओं की एकजुटता हुई तो यूपी में नीतीश की राजनीति को और धार मिल जाएगी। जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने भी शनिवार को मीडिया से बातचीत में गठबंधन की संभावनाओं से इंकार नहीं किया।