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फसल जलने पर फूटा गुस्सा, लाठी-डंडों से लैस हुई हजारों की भीड़, भाग खड़े हुए अफसर 

Thu, 01 Apr 2021 10:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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prayagraj news : आग से गेहूं की फसल जली। - फोटो : prayagraj
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खून पसीने से तैयार फसल को अपनी आंखों के सामने राख के ढेर में तब्दील होते देख ग्रामीणों की आंख में जहां आंसू थे तो लचर व्यवस्था के चलते वह बेहद आाक्रोशित भी थे। यही वजह रही कि जब करीब डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंची फायरब्रिगेड की एकमात्र गाड़ी का पानी कुछ ही देर में खत्म हुआ तो उनके आक्रोश का लावा फूट पड़ा। इसके बाद क्या कर्मचारी, क्या अफसर, सभी को उनके कोप का भाजन होना पड़ा। हालात यह रहे कि लाठी-डंडों से लैस हजारों की भीड़ देख अफसरों को भी भागकर जान बचाना पड़ा। 

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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ग्रामीणों को आग करीब 11.30 बजे के करीब लगी। कुछ ही देर में यह फैलने लगी। खेतों से धुआं व आग की लपटें उठने पर जानकारी हुई तो ग्रामीणों ने पुलिस व फायरब्रिगेड को सूचना दी। करीब दो घंटे बाद मौके पर फायरब्रिगेड की पहली गाड़ी पहुंची लेकिन तब तक आग काफी दूर तक फैल चुकी थी। आसपास के कई गांवों के कछार में स्थित खेतों की तैयार फसल तब तक राख हो चुकी थी। फायरब्रिगेड कर्मचारी सिंहापुर गांव के कछार में लगी आग पर काबू पाने का प्रयास करने लगे कि कुछ ही देर में उनकी गाड़ी का पानी खत्म हो गया। जिस पर ग्रामीण आक्रोशित होकर गाड़ी के ड्राइवर से उलझ गए।

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prayagraj news : आग से हजारों एकड़ फसल जली। - फोटो : prayagraj
इसी दौरान लेखपाल ने उन्हें समझाने की कोशिश की जिस पर वह और उग्र हो गए। साथ ही मारपीट करने लगे। लेखपाल मौके से भागा तो उसे खदेड़ लिया। मौके पर पहुंचे तहसीलदार को भी गाड़ी समेत दौड़ा लिया। पुलिस ने समझाना चाहा लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं थे। जिस पर नोकझोंक हुई और ग्रामीणों का गुस्सा पुलिसकर्मियों पर फूट पड़ा। पुलिस ने लाठियां भांजी तो दूसरी ओर से पथराव शुरू कर दिया गया जिस पर पुलिसकर्मियों को जान बचाकर भागना पड़ा। हजारों की भीड़ को देखते हुए अफसरों ने भी उल्टे पांव भागने में ही भलाई समझी। बाद में कई थानों की फोर्स पहुंचने पर हालात काबू में आ सके। 
लेखपाल की गलतबयानी से बिगड़ी बात
मौके पर मौजूद कुछ लोगों में यह भी चर्चा रही कि लेखपाल की गलतबयानी से बात बिगड़ गई। उनका कहना था कि दो घंटे बाद भी केवल एक फायरब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुंचने पर ग्रामीणों ने पूछा तो लेखपाल ने उनसे बताया कि मौके पर चार गाडिय़ां आग बुझाने में लगी हुई हैं। इसी बात पर ग्रामीणों का गुस्सा और भडक़ उठा और वह भला-बुरा कहने लगे। विरोध पर लेखपाल पर हमलावर हो गए। पुलिस अफसरों का भी यही कहना है कि पहले ग्रामीणों का राजस्वकर्मियों से विवाद हुआ।

गलत है राजस्वकर्मियों से विवाद की बात
मामले में एसडीएम सोरांव अनिल चतुर्वेदी का कहना है कि राजस्वकर्मियों से किसी तरह का विवाद नहीं हुआ। ग्रामीण फायरब्रिगेड की गाड़ी के ड्राइवर को पीट रहे थे जिस पर लेखपाल ने उसे बचाने की कोशिश की। इसी पर कुछ लोगों ने उससे मारपीट शुरू कर दी। वह मौके पर पहुंचे तो उनकी गाड़ी को घेरकर लाठी-डंडे बरसाने शुरू कर दिए। जिसके बाद किसी तरह वहां से निकलकर जान बचाई गई।
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