यूपी में वर्ष 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मोदी सरकार ने कमर कस ली है। केंद्र सरकार के काम प्रदेश की सपा सरकार के खाते में न जाएं इसके लिए मोदी सरकार यूपी में रेलवे के तहत होने वाले विभिन्न कार्यों के लिए धनराशि आवंटित करने जा रही है। इसके तहत उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) जोन के इलाहाबाद, आगरा एवं झांसी मंडलों को वर्ष भर के भीतर विभिन्न कार्यों के लिए रेलवे करोड़ों रुपये की रकम जारी करेगा।ं
यूपी का किला फतह करने की कोशिश में भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष पद पर सांसद केशव प्रसाद मौर्य की तैनाती के मास्टर स्ट्रोक के बाद अब मोदी सरकार के कामकाज को भुनाने का मन बनाया है। इसके लिए पार्टी ने रेलवे को सशक्त माध्यम के तौर पर चुना है। ऐसा इसलिए कि रेलवे के काम सीधे तौर पर मोदी सरकार के खाते में ही जाएंगे। प्रदेश में उत्तर मध्य रेलवे का मुख्यालय इलाहाबाद में है। इसके अधीन यूपी के तकरीबन आधे शहर है। इसमें मुख्य रूप से इलाहाबाद, मिर्जापुर, कानपुर, फतेहपुर, इटावा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, आगरा, झांसी, ललितपुर, उरई, महोबा, बांदा, चित्रकूट आदि जिले प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इन सभी शहरों में रेलवे कई कार्य कराएगा जिसके लिए पहले चरण में 1.40 अरब रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। मंडलवार बात करें तो इलाहाबाद मंडल में 44.25 करोड़, झांसी मंडल में 41.36 करोड़ और आगरा मंडल में सर्वाधिक 54.61 करोड़ रुपये से काम कराने की योजना है। फिलहाल तीनों मंडलों के विभिन्न स्टेशनों पर 104 कार्यों की सूची तैयार है। एनसीआर की लॉ बुक के मुताबिक सभी कार्यों में से प्राथमिकता के आधार पर होने पहले कामों को शार्ट लिस्ट किया जा रहा है।
इसमें तीनों मंडलों में कई सबवे, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, छिवकी में स्टेशन बिल्डिंग का विस्तार, अलीगढ-टूंडला स्टेशन पर कोच इंडीकेटर डिस्प्ले बोर्ड, झांसी डिवीजन के स्टेशनों में ट्रेन डिस्प्ले बोर्ड, झांसी मंडल में वाटर रीसाइकिल प्लांट, फतेहपुर सीकरी में प्लेटफार्म की ऊंचाई बढ़ाने, आगरा डिवीजन के स्टेशनों में पब्लिक एड्रेस सिस्टम में सुधार, गोवर्धन स्टेशन का विकास कार्य, इलाहाबाद केसूबेदारगंज स्टेशन का विकास, कानपुर में रेलवे कालोनी का सुधार, फफूंद, विंध्याचल, हाथरस, बम्हरौली स्टेशन को आदर्श स्टेशन के रूप में विकसित करना प्रमुख रूप से शामिल हैं।
‘एनसीआर प्रशासन अबकी जोन में यात्री सुविधा से जुड़े कई कार्य करवाएगा। जल्द ही इसके लिए टेंडर निकाला जाएगा। उम्मीद है कि इन सभी कामों को एक से दो वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।’
0 बिजय कुमार, सीपीआरओ, एनसीआर