Prayagraj News : ट्रिपलआईटी में दीक्षांत समारो का आयोजन किया गया।
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बीटेक (आईटी) के लिए इंस्टीट्यूट स्वर्ण पदक अभिषेकमनीष सिंह को दिया गया। मंथन राजू सुरकर और रोहिणी मिश्रा को क्रमश: रजत और कांस्यपदक से सम्मानित किया गया। बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशनइंजीनियरिंग) के किंग्सुक बाग, अभिज्ञानशर्मा और विवेक कुमार मेहता को क्रमश: स्वर्ण, रजतऔर कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।
एमबीए में महविश फातिमा को गोल्ड, अनीक्षा तिवारी को रजत और नादिरा खान को कांस्य पदक मिला। बीटेक-एमटेक (पांच वर्षीय दोहरी डिग्री) में मृदुल महाजन को स्वर्ण पदक, प्रभाकर कुमार को रजत और आर्य कृष्णनको कांस्य पदक प्रदान किया गया। एमटेक (आईटी) के छात्रों अच्युत दुबे, समीक्षा गुप्ता और अंकिता शाह कोक्रमश: स्वर्ण, रजतऔर कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। एमटेक इलेक्ट्रॉनिक संचार इंजीनियरिंग में रितिका चौबे को स्वर्ण, सुधांशु कुमार को रजत और श्रेयसीघोष को कांस्य मेडल से नवाजा गया।
Prayagraj News : ट्रिपलआईटी में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया।
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तनाव छोड़ जीवनभर सीखने का लें आनंद : श्रीराम राजमणि
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में शनिवार को 17वें दीक्षांत समारोह में माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया लैब के प्रबंध निदेशक श्रीराम राजमणि ने कहा कि सीखना एक सतत प्रक्रिया है, जोकि जीवनभर जारी रहती है। इसे तनाव के रूप में न लेकर आनंददायक बनाएं। उन्होंने मेधावियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के वर्तमान युग को रेखांकित करते हुए आने वाले अवसरों और चुनौतियों की भी जानकारी दी।
समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में श्रीराम राजमणि ने कहा कि एआई के क्षेत्र में बीते वर्षों में बहुत बदलाव आया है। आने वाले समय में भाषा मॉडल और चैट जीपीटी की भूमिका बड़ी होगी। कहा कि कॉलेज के बाद परीक्षाएं तो बंद हो जाएंगी, लेकिन सीखना बंद नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को स्नातक कक्षा के बाद आजीवन सीखने को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने मानव जीवन काल को बढ़ाने और प्रौद्योगिक में तेजी से बदलाव पर ध्यान देने की सलाह दी।
ट्रिपलआईटी में आयोजित दीक्षांत समारोह में बोलते माइक्रोसाफ्ट रिसर्च इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर।
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इसके पहले दीक्षांत समारोह की शुरुआत डॉ. श्रीराम राजामणि, अध्यक्ष, नासी मंडल ट्रिपलआईटी डॉ. आनंद देशपांडे और संस्थान के निदेशक प्रो.आर एस वर्मा ने की। दीक्षांत समारोह में 598 विद्यार्थियों को विभिन्न उपाधियां दी गई। साथ ही 37 शोधार्थियों को पीएचडी की डिग्री दी गई। समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ. आनंद देशपांडे ने कहा कि ज्ञान तभी योग्य है, जब यह आम आदमी के लिए उपयोगी होने के साथ समाज की समस्याओं को हल करने वाले नवाचारों पर कार्य करे।
कहा कि ट्रिपल आईटी में स्थापित न्यू जेन आईईडीसी, डिजाइन एंड इनोवेशन सेंटर, कॉग्निटिव कंप्यूटिंग सेंटर और इंटेलिजेंट रोबोटिक्स सेंटर जैसी विभिन्न इकाइयां ज्ञान को मूल्यवान तकनीकों में बदलने में सहायक रही हैं। संस्थान ने हाल के दिनों में संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, स्वीडन, इटली, ताइवान, वियतनाम, स्पेन और रूस एवं कई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालयों के साथ शिक्षण, सीखने, अनुसंधान, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक असाधारण वातावरण बनाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए है।
ट्रिपलआईटी में आयोजित दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया।
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उच्चतम पैकेज 1.2 करोड़ रहा
संस्थान के निदेशक प्रो. आरएस वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष कुल 226 कंपनियां संस्थान में प्लेसमेंट के लिए आई थीं। इसमें सबसे उच्चतम पैकेज लगभग 1.2 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष दिया गया। बीटेक से कुल 319 छात्रों को चुना गया। 137 एमटेक कार्यक्रम से और 29 प्रबंधन कार्यक्रम से छात्रों का चयन हुआ है। उन्होंने छात्रों से विज्ञान और आध्यात्म के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करने पर बल दिया।