हौव्वा नहीं एआई, इसके साथ चलना सीखना होगा
डॉ. नीलेश मानते हैं कि एआई ऐसे वक्त में आई है जब हम सीखने के दौर में हैं। इसके लिए हमें खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए। उनका कहना है कि एआई कोई हौव्वा नहीं है। हमें इसके साथ चलना सीखना होगा। भविष्य में इसके बिना हमारा काम नहीं चलेगा।
एआई से उत्पादन बढ़ेगा लेकिन यह मानव का विकल्प नहीं
एआई के कारण भविष्य में नौकरियों पर संकट बढ़ेगा... इस सवाल के जवाब में डॉ. नीलेश कहते हैं कि एआई के बेहतर उपयोग से उत्पादन (प्रोडक्शन) बढ़ेगा और कंपनियां विस्तार करेंगी। ऐसे में नौकरियों पर फिलहाल कोई संकट नजर नहीं आता। वैसे भी एआई मानव का प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट) नहीं हो सकता।
वर्चुअल रियलटी की अनोखी दुनिया दी
डाॅ. नीलेश के अनुसार, एआई तकनीक ने हमें वर्चुअल रियलटी की नई दुनिया दी है जो एकदम अलग और अनोखी है। उदाहरण के तौर पर महानगरों में बिल्डर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं जो निर्माण से पहले ही ग्राहक को एआई के जरिये वर्चुअल रियलटी की दुनिया में ले जाते हैं जहां कुछ न होते हुए भी सबकुछ असली लगता है।