खतौनी में अगर अंश गाटे का निर्धारण नहीं हुआ है तो जमीन बेचने वाले को रजिस्ट्री में लिखकर देना होगा कि वह जमीन का कितना हिस्सा बेच रहा है। खतौनी में अंश निर्धारण न होने से रजिस्ट्री होने के बाद विवाद सामने आ रहे हैं जिन्हें रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पिछले दिनों कई ऐसे मामले सामने आए जब मौके पर कब्जा लेने पहुंचे भूमि क्रेता को विरोध का सामना करना पड़ा। पता चला कि उसने जितने क्षेत्रफल की रजिस्ट्री कराई है, उसका कुछ हिस्सा दूसरे के नाम दर्ज है। ऐसे में अब क्रेता को मुकदमा लड़ना पड़ रहा है।
ऐसे में यह निर्णय लिया गया कि खतौनी में अगर अंश निर्धारण नहीं है या उसमें त्रुटि है तो संबंधित जमीन की रजिस्ट्री न की जाए।हालांकि, इस निर्णय से सरकार को ही राजस्व का नुकसान होने लगा और फिर तय किया गया कि अगर खतौनी में अंश निर्धारण नहीं है या खतौनी त्रुटिपूर्ण है तो ऐसे मामले में जमीन विक्रेता को रजिस्ट्री में ही लिखकर देना होगा। एआईजी स्टांप राकेश चंद्रा ने बताया कि खतौनी न होने पर रजिस्ट्री में संपत्ति के विक्रेता के अंश की जानकारी दर्ज कराई जा रही है।
84 फीसदी अंश गाटों का हुआ निर्धारण
जिले में अभियान चलाकर अंश गाटों का निर्धारण किया जा रहा है ताकि रजिस्ट्री के बाद भूमि से संबंधित कोई विवाद ही न रह जाए। यह अभियान 20 जून से शुरू किया गया था और इसे 30 जून तक पूरा किए जाने का लक्ष्य है। जिले के 3178 राजस्व ग्रामों में कुल तीन लाख 95 हजार 655 अंश गाटों का निर्धारण किया जाना था। अब तक 84 फीसदी अंश गाटों का निर्धारण किया जा चुका है। एडीएम नजूल संजय पांडेय ने बताया कि अंश गाटों के निर्धारण के साथ खतौनी में त्रुटि संशोधन का कार्य भी किया जा रहा है।