कुंभ के कार्यों में गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को अफसरों को आगाह किया। सर्किट हाउस में उन्होंने चेताया कि कुंभ के तहत सड़कों, पुलों के निर्माण या अन्य कार्यों में गुणवत्ता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गड़बड़ी करने वाले अफसर बख्शे नहीं जाएंगे। पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों के साथ कुंभ के तहत कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने अफसरों को यह चेतावनी दी।
उपमुख्यमंत्री ने सेतु निगम के अधिकारियों से फ्लाईओवर-आरओबी निर्माण की प्रगति की जानकारी ली और समय से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। फ्लाईओवर की प्रगति की जानकारी सेतु निगम के एमडी उत्तम कुमार गहलोत और मुख्य परियोजना प्रबंधक सतीश कुमार ने दी। सेतु निगम के अधिकारियों ने 30 नवंबर तक हाईकोर्ट फ्लाईओवर पानी रकी टंकी आरओबी, एमएनआईटी, मनौरी आरओबी पूरा करने की बात कही। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता व अन्य अफसरों को उन्होंने निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान दिया जाए। इसमें किसी प्रकार शिथिलता न बरती जाए। डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को कार्यों को शीघ्रता से पूरा करने और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया। साथ ही अधिकारियों को सचेत किया कि अगले हफ्ते वह फिर कुंभ के कार्यों का निरीक्षण करेंगे। गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। समीक्षा बैठक के बाद डिप्टी सीएम ने हाईकोर्ट के पास बन रहे फ्लाईओवर का निरीक्षण किया। इसके बाद भारद्वाज पार्क पहुंचे। वहां उन्होंने पार्क के सौंदर्यीकरण का जायजा लिया।
कर्नलगंज में के भाजपा बूथ समिति के अभिनंदन सामारोह में डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेला को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। प्रयागराज को हमारी सरकार दुनिया का सबसे सुंदर शहर बनाने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में अनेक विकास कार्य हो रहे हैं। उन कार्यों के पूरा होते ही जनता को प्रयागराज एक बदले हुए रूप में नजर आएगा। इसके लिए अतिक्रमण और अवैध कब्जे हटाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
डिप्टी सीएम ने मंदिरों, तीर्थस्थलों को भव्यता प्रदान करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रमुख मंदिरों के भव्य द्वार बनाकर आकर्षक रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रयागराज के प्रमुख मंदिरों के भव्य द्वार बनाए जाएं, ताकि देश-दुनिया से आने वालें तीर्थयात्रियों को एक नए कलेवर में मंदिरों का स्वरूप दिखे।