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अगर जज गलती करेंगे तो आम जनता को न्याय कहां से मिलेगा: हाईकोर्ट

Wed, 10 Feb 2021 08:24 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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allahabad highcourt - फोटो : prayagraj
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार-बार निर्देशों और न्यायिक आदेशों के बावजूद जिला अदालतों द्वारा प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन आदेश जारी करने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर जज ही गलती करेंगे तो आम जनता को निष्पक्ष न्याय कहां से मिल पाएगा। कोर्ट ने बुलंदशहर के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम को चेतावनी दी है कि भविष्य में वह समन आदेश जारी करते समय ज्यादा सावधानी बरतें और कोई भी आदेश बिना कारण दर्शाये न जारी किया जाए। 

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बुलंदशहर के राहुल व तीन अन्य की ओर से 482 सीआरपीसी के तहत दाखिल अर्जी को स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने दिया है। याची के अधिवक्ता महेश शर्मा का कहना था कि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कक्ष संख्या एक बुलंदशहर ने सात सितंबर 2020 को याचीगण को प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी किया है। यह आदेश जारी करते समय मजिस्ट्रेट ने अपने न्यायिक विवेक का प्रयोग नहीं किया। इसलिए यह रद्द किए जाने योग्य है।

अधिवक्ता का कहना था कि यह स्थापित कानून है कि कोई भी समन प्रिंटेड प्रोफार्मा पर नहीं जारी किया जाएगा और समन जारी करते समय ऐसा करने का कारण स्पष्ट किया जाएगा। हाईकोर्ट की खंडपीठ व कई अन्य न्यायपीठों ने इसे लेकर आदेश दिए हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट द्वारा प्रशासनिक स्तर पर भी जिला न्यायालयों को आदेश भेजे गए हैं। 
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कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला जज बुलंदशहर को संबंधित मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण लेकर उसे सूचित करने का निर्देश दिया था। अपने स्पष्टीकरण में मजिस्ट्रेट ने स्वीकार किया कि उनसे गलती हुई है। उन्होंने बिना शर्त माफी मांगते हुए भविष्य में यह गलती नहीं दोहराने का वचन दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि जज भगवान की तरह काम करते हैं। उनको जल्दबाजी या काम की अधिकता की वजह से गलती करने का अधिकार नहीं है। अगर जज गलती करेंगे तो आम जनता को निष्पक्ष न्याय कौन देगा। कोर्ट ने प्रिंटेड प्रोफार्मा पर जारी समन आदेश रद्द कर दिया है और नए सिरे से कारण देते हुए दो माह में नया आदेश जारी करने का निर्देश दिया है।

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