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अग्निशमन के मानक पूरे नहीं, तो कोचिंग संचालक पर होगी रिपोर्ट

Mon, 27 May 2019 01:24 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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fire extinguisher cylinder
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अग्निशमन मानकों को ताक पर रखकर कोचिंग संस्थानों का संचालन करने वालों पर अब रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। सूरत में हुए हादसे के बाद नींद से जागे अफसरों ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में डीआईओएस ने एक टीम गठित कर दी है जो सोमवार से कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण करेगी। मानकों का उल्लंघन होते मिला तो कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एर्फआईआर दर्ज कराई जाएगी। 
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गुजरात के सूरत में 24 मई को भीषण अग्निकांड में 20 से ज्यादा छात्र-छात्राओं की मौत हो गई थी। आग चार मंजिला भवन में स्थित कोचिंग सेंटर में उस वक्त लगी थी, जब उसमें बच्चे पढ़ रहे थे। अमर उजाला ने जांच पड़ताल की तो पता चला कि जिले में भी अधिकांश कोचिंग संस्थान ऐसे हैं, जिनमें आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। जिसके बाद इस संबंध में प्रमुखता से खबर भी प्रकाशित की गई। खबर छपने के बाद अफसर नींद से जागे और अब उन्होंने छात्र-छात्राओं की जान से खिलवाड़ करने वाले कोचिंग संचालकों पर कार्रवाई के लिए कदम उठाए हैं।

डीआईओएस का कहना है कि मीडिया में आई खबरों के माध्यम से संज्ञान में आया है कि जनपद मेें बिना अग्निशमन मानकों को पूरा किए धड़ल्ले से कोचिंंग संस्थानों का संचालन हो रहा है। इनमें से कई बिना पंजीकरण के भी चल रहे हैं। ऐसे में एक टीम गठित की गई है जो सोमवार से कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण करेगी। साथ ही बगैर पंजीकरण, अग्निशमन मानकों के चल रहे संस्थानों की रिपोर्ट देगी जिन पर विभाग की ओर से कार्रवाई करने के साथ ही संचालकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। एडीआईओएस पीके पांडेय में टीम गठित की गई है। 
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उधर अग्निशमन मानकों का उल्लंघन कर चलाए जा रहे कोचिंग संस्थानों पर अग्निशमन विभाग भी लगाम कसने की तैयारी में है। इसके लिए विभाग की ओर से जिले भर में चल रहे कोचिंंग संस्थानों की सूची डीआईओएस कार्यालय से मांगी गई हैं। सीएफओ रविंद्र शंकर मिश्र का कहना है कि इस संबंध में डीआईओएस कार्यालय को पत्र भेजा गया है। उन्होंने बताया कि हालांकि 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले भवनों में चल रहे कोचिंग संस्थानों पर सीधे कार्रवाई का अधिकार उन्हें नहीं है। लेकिन इसकी रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को भेजी जाएगी। 

माध्यमिक शिक्षा व अग्निशमन विभाग ने भले ही कार्रवाई के लिए पहल कर दी हो लेकिन उनकी ओर से दिए जा रहे बयान परस्पर विरोधी हैं। एडीआईओएस पीके पांडेय ने बताया कि जिले में कुल 1087 पंजीकृत छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान हैं। इनमें से शहर के कई बड़े संस्थान हैं जिन्होंने विभाग के कहने पर पंजीकरण से पहले अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया है। उधर, सीएफओ का कहना है कि उनकी ओर से किसी भी कोचिंग संस्थान को एनओसी नहीं दी गई। ऐसे में सवाल यह है कि दोनों में से आखिर झूठ कौन और क्यों बोल रहा है। 

इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि अफसरों ने इस मामले में कार्रवाई के लिए अब तक इंतजार क्यों किया। आखिर पंजीकरण से पहले ही माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संबंधित कोचिंग संचालकों से एनओसी क्यों नहीं मांगी। उधर अग्निशमन विभाग ने ऐसे संस्थानों के संबंध में निरीक्षण कर रिपोर्ट जिला प्रशासन को क्यों नहीं सौंपी। मामले में अफसर गोलमोल जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हैं। मामले में सीएफओ ने तो चौंकाने वाला बयान दिया। उनका कहना है कि जब तक आदेशित न किया जाए, वह स्वयं से ऐसे किसी संस्थान में जाकर निरीक्षण नहीं कर सकते। 
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