पार्किंग की करते हैं निगरानी
अमित कुमार ने बताया कि इसके अलावा हम कैमरों से फायर सर्विलांस भी कर रहे हैं। कहीं धुआं या आग की लपट तो नहीं है। इसके अलावा पार्किंग का भी इसके जरिये सर्विलांस किया जा रहा है। हर पार्किंग में कैमरे लगाए गए हैं जो बताते हैं कि कौन सी पार्किंग कितनी खाली या भरी है। जब कोई पार्किंग भर जाती है, फिर हम उसको बंद करके अगली वाली पार्किंग एक्टिवेट करते हैं। सबसे पहले हम सबसे पास की पार्किंग को भरते हैं जिससे स्नानार्थियों को कम से कम चलना पड़े। इसके बाद हम उससे आगे की ओर बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि सात मुख्य मार्ग हैं जो प्रयागराज को अन्य शहरों से जोड़ते हैं, उसको देखते हुए सभी दिशाओं में इस तरह की पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
एआई कैमरों से निर्णय लेने में मिलती है मदद
एआई कैमरा की उपयोगिता पर उन्होंने कहा कि एआई कैमरों से निर्णय लेने में काफी मदद मिलती है, लेकिन हम पूरी तरह इन पर डिपेंड नहीं है। यह हमारी क्षमता को निश्चित रूप से बढ़ाते हैं, क्योंकि इससे पहले इतना बड़ा क्राउड कंट्रोल नहीं किया गया था। हमारी फोर्स की अपनी इंस्टीट्यूशन ट्रेनिंग है, लेकिन अगर इसको हम डाटा बेस्ड और एविडेंस बेस्ड रखें तो वह हमें अपनी स्किल को और बेहतर करने में मदद करती है। उन्होंने बताया कि पूरे मेला क्षेत्र में चार आई ट्रिपल सी है। यदि कहीं एक जगह कोई प्रॉब्लम आती है तो आपात स्थिति में दूसरी यूनिट को उपयोग में लाया जा सकता है। इनके बीच बेहतर कनेक्टिविटी है और सभी जगह से मॉनिटरिंग संभव है।
सभी प्रमुख स्थानों पर इंस्टाल हैं कैमरे
उन्होंने बताया कि मेला क्षेत्र में जितने भी क्रिटिकल और सेंसिटिव एरिया हैं वहां पर कैमरे इंस्टॉल किए गए हैं। जितने भी घाट हैं, प्रमुख सड़के हैं, पुल है, सभी जगह कैमरे लगाए गए हैं क्योंकि यहीं से हमें ये जानकारी मिलेगी कि कहां पर भीड़ का मूवमेंट कितना है। खासतौर पर संगम पर कैपेसिटी कितनी है, ताकि हम इस पर काम कर सकें। एक और चीज यह भी है कि हमें पता है कि इस तरह के आयोजनों में लोग कैसे इकट्ठा होते हैं। पूरे शहर में एक ही क्राउड डेंसिटी नहीं होती है। घाट पर भीड़ ज्यादा होती है और पीछे कम होती है। इसमें भी हमको हमारी लर्निंग का फायदा मिलता है।
रियल टाइम बेसिस के आधार पर की जाती है भीड़ की गिनती
महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की एआई बेस्ड कैमरे की मदद से भीड़ की गिनती करने में भी मदद मिलती है। ड्रोन और कैमरों की मदद से भीड़ के घनत्व, वाहनों की संख्या के आधार पर अनुमान लगाया जाता है। भीड़ की गिनती करने के लिए स्पेशल टीम बनाई गई है। इस टीम का नाम क्राउड एसेसमेंट टीम है। रियल टाइम बेसिस के आधार पर यह टीम मेले में आने वाले लोगों की गिनती कर रही है। एआई बेस्ड कैमरों से भीड़ की फेस रीडिंग की जाती है। फेस स्कैन के माध्यम से यह अनुमान लगाया जाता है कि कितनी देर में कितने लाख श्रद्धालु मेले में पहुंचे। पूरे मेला क्षेत्र में 1800 से अधिक कैमरे लगाए गए हैं।